रायपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर को संगठन को मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी का अहम पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि शिविर में कार्यकर्ताओं और जिला अध्यक्षों को विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे जनता के मुद्दों को मजबूती से उठा सकें और संगठन को बूथ स्तर तक सशक्त बनाया जा सके।
बैज ने कहा कि कांग्रेस ने अभी से वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद जिलाध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर “अर्जुन की तरह लक्ष्य साधेंगे” और भाजपा की नीतियों का मजबूती से मुकाबला करेंगे। उनका कहना था कि कांग्रेस का लक्ष्य प्रदेशवासियों को भाजपा के “छल-प्रपंच” से दूर करना है।
प्रशिक्षण शिविर पर मंत्री रामविचार नेताम की टिप्पणी का जवाब देते हुए बैज ने कहा कि कांग्रेस गांधीवादी विचारधारा की ट्रेनिंग देती है, गोडसे की नहीं। उन्होंने दावा किया कि यदि रामविचार नेताम कांग्रेस के प्रशिक्षण शिविर में एक घंटे बैठ जाएं तो वे मंत्री पद और भाजपा दोनों छोड़ देंगे। चंदखुरी में भगवान श्रीराम की नई प्रतिमा स्थापित नहीं होने के मुद्दे पर बैज ने भाजपा पर भगवान राम के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय प्रतिमा बदलने का निर्णय लिया गया था, लेकिन वर्तमान सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।
सोशल मीडिया पर हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट के मामले में बैज ने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक भावनाएं भड़काने की कोशिश की जा रही है और प्रदेश की कानून-व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। यूसीसी (समान नागरिक संहिता) के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसे आदिवासियों के हितों के खिलाफ लाया जा रहा है। उनका आरोप था कि इससे पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची के प्रावधान कमजोर होंगे और इसका लाभ कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को मिलेगा।
सक्ती गोलीकांड का उल्लेख करते हुए बैज ने कहा कि कांग्रेस ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जो पीड़ित परिवार से मिलकर न्याय दिलाने का प्रयास करेगी। उन्होंने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दी। खाद संकट और टोकन व्यवस्था हटाने के फैसले पर बैज ने कहा कि यह किसानों और कांग्रेस के दबाव का परिणाम है। उन्होंने सवाल उठाया कि केवल टोकन व्यवस्था खत्म करने से खाद की समस्या का समाधान नहीं होगा। साथ ही चेतावनी दी कि यदि खाद की कमी के कारण कोई किसान आत्महत्या करता है तो इसकी जिम्मेदारी भाजपा सरकार की होगी।
