कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहा हाई-वोल्टेज ड्रामा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हुई बड़ी बगावत के महज दो दिन बाद ही अब नया ट्विस्ट आ गया है। ममता बनर्जी की पार्टी तोड़कर अलग गुट बनाने वाले 60 बागी विधायकों के खेमे में ही बड़ी फूट पड़ गई है। कई बागी विधायकों ने अब रितब्रता बनर्जी को अपना बॉस मानने से इनकार करते हुए दोबारा ममता बनर्जी के प्रति अपनी वफादारी जता दी है।
हावड़ा के पांचला से बागी विधायक गुलशन मलिक ने इस बगावत के भीतर मची रार को खुलकर सामने ला दिया है। मलिक का दावा है कि हावड़ा जिले के ही 6 से 7 विधायक उनके संपर्क में हैं, जो रितब्रता बनर्जी के उस फॉर्मूले के खिलाफ हैं जिसमें ममता बनर्जी को सिर्फ एक ‘मार्गदर्शक’ (गाइड) बनाकर छोड़ देने की बात कही जा रही है। गुलशन मलिक ने दोटूक कहा, “ममता बनर्जी सिर्फ मार्गदर्शक रहेंगी और नेतृत्व छोड़ देंगी, यह हमें कतई मंजूर नहीं है। वे ही हमारी एकमात्र नेता हैं और हमेशा रहेंगी।”
गौरतलब है कि, 3 जून को 60 बागी विधायकों ने रितब्रता बनर्जी और संदीपन साहा की अगुवाई में अलग गुट बनाकर असली TMC होने का दावा ठोंका था। विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने इस दावे को स्वीकार करते हुए रितब्रता बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता भी दे दी थी। लेकिन अब बागी गुट के भीतर ही शुरू हुई इस आंतरिक कलह ने पश्चिम बंगाल के इस सत्ता संघर्ष को एक बेहद दिलचस्प और अनपेक्षित मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।
