लोकसभा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया SPL मिलावट का मुद्दा, सरकार बोली- कोयले में जहरीले कचरे की मिलावट अपराध

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रायपुर/नई दिल्ली। मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने एल्युमिनियम उद्योग से निकलने वाले अति-विषैले अपशिष्ट स्पेंट पॉट लाइनिंग (SPL) के अवैध निपटान और इसे वाणिज्यिक कोयले में मिलाए जाने के कथित मामलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार से इस संबंध में जानकारी मांगी और जनस्वास्थ्य व पर्यावरण सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से पूछा कि एल्युमिनियम संयंत्रों द्वारा विषैले SPL को कोयले में मिलाकर बेचने जैसी गतिविधियों पर क्या कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने सीमेंट उद्योगों में SPL के सुरक्षित निपटान, पिछले पांच वर्षों में हुए उल्लंघनों और तृतीय-पक्ष विक्रेताओं की जिम्मेदारी तय करने से जुड़े सवाल भी उठाए।

सांसद के सवालों के जवाब में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा कि वाणिज्यिक कोयले में SPL मिलाना पूरी तरह गैर-कानूनी है। उन्होंने बताया कि खतरनाक एवं अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन तथा सीमापार परिवहन) नियम, 2016 के तहत SPL को अति-खतरनाक अपशिष्ट की श्रेणी में रखा गया है और इसका निपटान केवल अधिकृत रीसाइक्लर्स या TSDF सुविधाओं के माध्यम से ही किया जा सकता है।

सरकार ने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB) को कार्रवाई के अधिकार दिए गए हैं। इसमें संयंत्र बंद करना, पर्यावरणीय जुर्माना लगाना और आपराधिक कार्रवाई शुरू करना शामिल है।

केंद्र सरकार ने यह भी जानकारी दी कि 1 अप्रैल 2026 से एल्युमिनियम उत्पादकों के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत कंपनियों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के डिजिटल पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा और विषैले अपशिष्ट के सुरक्षित प्रबंधन की जिम्मेदारी मूल उत्पादक कंपनी की होगी।

बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक प्रमुख औद्योगिक राज्य है और यहां कई बड़े एल्युमिनियम संयंत्र संचालित हैं। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास जरूरी है, लेकिन पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एल्युमिनियम संयंत्रों, विक्रेताओं और सीमेंट इकाइयों की सख्त निगरानी की मांग की।