- कृष्ण जन्माष्टमी पर भक्ति का सैलाब, जैतुसाव मठ में 11 क्विंटल मालपुआ और 101 लीटर दूध से अभिषेक,
- कोतवाली थाने की जेल में भी जन्मा कान्हा, इस्कॉन मंदिर में महाभिषेक का भी आयोजन
रायपुर। राजधानी रायपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अत्यंत धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शहर के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में जन्माष्टमी महामहोत्सव का आयोजन हुआ, जहां दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। पुरानी बस्ती के जैतुसाव मठ में 110 साल पुरानी परंपरा के तहत 11 क्विंटल मालपुआ और 1 क्विंटल पंजीरी का महाभोग लगाया गया तो समता कॉलोनी में 101 लीटर दूध से अभिषेक किया गया। फूलों और झालरों से सजे मंदिरों में युवाओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी पर्व की शुरुआत सुबह 4 बजे भगवान श्रीकृष्ण की मंगल आरती और दर्शन के साथ शुरू हुई। श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की भी व्यवस्था की गई थी। रात 9 बजे भगवान श्रीकृष्ण का महाभिषेक किया गया, वही रात 12 बजे महाआरती के साथ भगवान के जन्मोत्सव का भव्य आयोजन किया गया।
जैतुसाव मठ में स्वर्ण श्रृंगार और महाभोग
पुरानी बस्ती स्थित जैतुसाव मठ में जन्मोत्सव भव्य रूप से मनाया गया। सुबह से मंदिर में भक्तों की भीड़ रही। शाम 4 बजे भजन गायन का आयोजन हुआ। जन्मोत्सव पर ठाकुरजी का स्वर्ण श्रृंगार किया गया और रात 12 बजे मंत्रोच्चार के साथ आरती हुई। 5 सितंबर शाम 5 बजे श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया जाएगा।
राधाकृष्ण मंदिर समता कॉलोनी में 101 लीटर दूध से अभिषेक
यहां सुबह से 101 लीटर दूध से भगवान का अभिषेक किया गया। मंदिर और प्रतिमा का श्रृंगार कोलकाता के कारीगरों ने किया। सुबह 9 बजे से झांकी दर्शन, रात 8 बजे तक भजन और मध्यरात्रि में जन्मोत्सव के बाद महाआरती हुई। 5 सितंबर को राणी सती दादी का मंगल पाठ भी होगा।
इस्कॉन में 3 दिन तक महोत्सव
टाटीबंध स्थित इस्कॉन मंदिर में 5 सितंबर तक महामहोत्सव चलेगा। जिसमें कृष्ण बाललीला, भजन-कीर्तन, पुष्पांजलि, कथक, भक्ति नृत्य और प्रतियोगिताएं होंगी। इस वर्ष इस्कॉन मंदिर की सजावट को विशेष रूप दिया गया है। जन्माष्टमी पर मंदिर के बाहर से लेकर अंदर तक ताजे फूलों से सजावट की गई है । सजावट के लिए मयूर थीम को चुना गया है। मंदिर परिसर में जगह-जगह मोर पंखों की सजावट देखने को मिला। भगवान श्रीकृष्ण को भी मयूर थीम के अनुरूप सजाया गया है। फूलों और मोर पंखों से की जाने वाली यह सजावट श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।
दूधाधारी मठ में 7 सितंबर तक उत्सव
दूधाधारी मठ और उससे जुड़े मंदिरों में जन्माष्टमी पर्व 7 सितंबर एकादशी तक मनाया जाएगा। शुक्रवार सुबह 8 बजे से भजन-कीर्तन शुरू होकर रात 12 बजे जन्मोत्सव आरती तक चला।
156 साल पुराने बांके बिहारी मंदिर में दुग्धाभिषेक
पेठा लाइन नयापारा के 156 साल पुराने बांके बिहारी मंदिर में सुबह 8 से 10 बजे दुग्धाभिषेक, 11.30 बजे श्रृंगार दर्शन, दोपहर-शाम भजन और रात 12.01 बजे जन्मोत्सव आरती हुई।
गिरिराज मंदिर में चार धाम की सामग्री से पूजा
बूढ़ापारा के गिरिराज मंदिर में बद्रीनाथ, जगन्नाथपुरी, रामेश्वर और द्वारका धाम से लाई सामग्री से आराधना की गई। तैयारियां एक महीने पहले से शुरू हुई थीं।
गोपाल मंदिर में नंद महोत्सव आज
सदर बाजार स्थित गोपाल मंदिर में 4 सितंबर रात 12 बजे जन्मोत्सव मनाया गया और 5 सितंबर को नंद महोत्सव मनाया जाएगा, जिसमें भगवान को पालने में झुलाया जाएगा।
कोतवाली थाने के कारागार में जीवंत झांकी
सिटी कोतवाली में भी धूमधाम से उत्सव मना। वासुदेव, देवकी, सैनिकों की वेशभूषा में कलाकारों ने मंचन किया। रात 12 बजे थाने की लाइट बंद कर वासुदेव द्वारा टोकरी में कृष्ण को सिर पर रखकर ले जाने की लीला दिखाई गई। फिर जयकारों के साथ ठाकुरजी को गोपाल मंदिर ले जाया गया।
कान्हा के साथ सात भाइयों की पूजा –
शुक्रवार रात 12 बजे नंद घर आनंद भयो के जयकारों के बीच उत्सव मनाया गया। छत्तीसगढ़ की अनोखी परंपरा के तहत घरों में कान्हा के साथ उनसे पहले जन्मे सात भाइयों की भी पूजा की गई, जिसके लिए दीवारों पर आठ बाल चित्र बनाए गए।



