बिलासपुर। ममता का रिश्ता खून से नहीं, भावना से जुड़ा होता है, इसी को साबित करती एक सौतेली मां की यह अनोखी कहानी सामने आई है। 26 वर्षीय मानसिक दिव्यांग युवती की सगी मां के निधन के बाद महिला ने वर्ष 2012 में उसके पिता से विवाह किया और तभी से बेटी की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। समय के साथ पारिवारिक विवाद बढ़ने पर महिला अपनी सौतेली बेटी को लेकर मनेंद्रगढ़ स्थित मायके आ गई, जहां वह उसकी पूरी देखभाल कर रही है। बेटी भी अपनी सौतेली मां के साथ ही रहना चाहती है। वर्ष 2022 में जैविक पिता ने बेटी को जबरन अपने साथ ले जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ।
इसके बाद महिला ने बेटी की कानूनी अभिभावक बनने के लिए परिवार न्यायालय में आवेदन दायर किया, लेकिन न्यायालय ने अधिकार क्षेत्र का हवाला देते हुए इसे खारिज कर दिया। इसके खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। हाईकोर्ट ने मामले में सीधे हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए कहा कि, संबंधित कानून के तहत इस तरह के मामलों में निर्णय का अधिकार लोकल कमेटी को है। साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित लोकल कमेटी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी और कमेटी को कानून के अनुसार उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि, सच्ची ममता रिश्तों की सीमाओं से परे होती है।
