बिलासपुर। चर्चित विराट सराफ अपहरण कांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपियों की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए स्पष्ट कहा कि आरोपियों के खिलाफ पेश किए गए सबूत मजबूत और विश्वसनीय हैं।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवार की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान माना कि आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत नाबालिग विराट सराफ का अपहरण कर फिरौती मांगने की कोशिश की थी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि, अभियोजन पक्ष ने मौखिक गवाहों, पहचान संबंधी दस्तावेजों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और साइबर एनालिसिस रिपोर्ट जैसे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के जरिए आरोपियों की संलिप्तता साबित कर दी।
इन सबूतों से यह साफ हुआ कि अपराध को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने पहले से योजना बनाई थी और मिलकर काम किया था। अदालत ने माना कि, यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 364-A (फिरौती के लिए अपहरण) और 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत पूरी तरह सिद्ध होता है। गौरतलब है कि, विराट सराफ अपहरण कांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था और यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा। हाईकोर्ट के इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए बड़ी न्यायिक राहत माना जा रहा है।
