बीजापुर। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता को बचत और मेहनत से जोड़कर भट्टीपारा निवासी 30 वर्षीय लख्मी नाग ने अपने परिवार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। योजना की राशि से बचत कर उन्होंने अपनी 65 वर्षीय सास लक्ष्मी नाग के साथ मिलकर घर के सामने छोटी किराना दुकान शुरू की है। लख्मी संयुक्त परिवार में अपनी सास और 8 वर्षीय बेटे के साथ रहती हैं। परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करना पहले चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में महतारी वंदन योजना से मिलने वाली सहायता उनके लिए आर्थिक संबल बनी। लख्मी और उनकी सास दोनों को योजना के तहत हर माह एक-एक हजार रुपये मिलते हैं। दोनों ने राशि को नियमित रूप से बचाकर दुकान शुरू करने का निर्णय लिया।
लख्मी के मुताबिक, योजना से मिली राशि ने उन्हें केवल आर्थिक मदद नहीं दी, बल्कि खुद का काम शुरू करने का आत्मविश्वास भी दिया। अब किराना दुकान परिवार की अतिरिक्त आय का जरिया बन गई है और घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिल रही है। दुकान में रोजमर्रा के किराना सामान के साथ महिलाओं की जरूरत की फैंसी सामग्री भी रखी गई है। इसके अलावा मिट्टी के गमले, दीये और बस्तर की पहचान मानी जाने वाली बांस की टोकरियां भी यहां उपलब्ध हैं। इस तरह दुकान में स्थानीय संस्कृति और दैनिक जरूरत की वस्तुओं का मेल देखने को मिलता है।
लख्मी अपने 8 वर्षीय बेटे को बीजापुर के सेंट थॉमस स्कूल में पढ़ा रही हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार से अब बेटे की पढ़ाई और बेहतर भविष्य का सपना भी मजबूत हुआ है। लख्मी और उनकी सास की कहानी बताती है कि छोटी-सी आर्थिक सहायता को बचत और मेहनत के साथ जोड़ा जाए तो वह आत्मनिर्भरता की बड़ी शुरुआत बन सकती है। उनकी यह पहल महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और परिवार की मजबूती का उदाहरण बन रही है।

