सारंगढ़। छोटी-सी उम्र, लेकिन सपनों का आसमान बहुत बड़ा। शासकीय प्राथमिक शाला दहिदा की कक्षा पांचवीं की छात्रा कामिनी चंद्रा ने जब अपने सपनों के भारत की तस्वीर शब्दों में उकेरनी शुरू की, तो देखते ही देखते कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों का ध्यान उसकी ओर खिंच गया। शासकीय प्राथमिक शाला दहिदा की छात्रा कामिनी ने पी.एम. सेजेस सारंगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में अपनी बेबाक और धारा प्रवाह अभिव्यक्ति से ऐसा भारत सामने रखा, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, हरियाली, स्वच्छता, प्रेम और एकता के रंग साफ दिखाई दे रहे थे।
कामिनी ने कहा कि उसके सपनों का भारत ऐसा हो, जहां हर बच्चे को शिक्षा मिले और कोई भी बच्चा स्कूल जाने से न छूटे। हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले, सभी स्वस्थ रहें और देश का हर बच्चा तंदुरुस्त एवं खुशहाल हो। वह ऐसा भारत देखना चाहती है, जहां चारों ओर हरियाली हो, देश स्वच्छ और सुंदर हो तथा लोग मिलकर पेड़ लगाएं।
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उसकी कल्पना का भारत केवल स्वच्छ और हरा-भरा ही नहीं, बल्कि प्रेम और एकता से जुड़ा भारत भी है। कामिनी ने कहा कि देश के सभी लोग बिना किसी भेदभाव के मिल-जुलकर रहें। उसकी बातों में समानता और भाईचारे का भाव सहज रूप से दिखाई दिया। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उसने पूरे विश्वास के साथ कहा कि “हम 25 करोड़ बच्चे मिलकर अपने सपनों को सच करेंगे।”
कामिनी की यह बात विशेष रूप से ध्यान खींचने वाली रही कि देश के लिए कुछ करने के लिए बच्चों का बड़ा होना जरूरी नहीं है। उसने कहा कि “हम छोटे बच्चे भी अपने देश के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं।” इसके बाद जब उसने कहा कि “हम बदलेंगे तो देश बदलेगा”, तो उसकी बात में बच्चों की भूमिका और भविष्य के भारत के प्रति उनके संकल्प की स्पष्ट झलक दिखाई दी।
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कामिनी ने अपने विचारों के माध्यम से कोई लंबा भाषण नहीं दिया, बल्कि सहज शब्दों में अपने मन में बसे भारत की ऐसी तस्वीर सामने रखी, जिसे सुनते हुए मानो बच्चों के सामने एक सुंदर और संवेदनशील देश का दृश्य आकार लेने लगा। उसकी बेबाकी, आत्मविश्वास और धारा प्रवाह शैली ने यह एहसास कराया कि देश के भविष्य की कल्पना केवल बड़ों के मन में ही नहीं, बल्कि बच्चों की आंखों में भी उतनी ही खूबसूरती से पल रही है।
