बस्तर में विदेशी फंडिंग की जांच तेज! गांवों में चर्च निर्माण पर ED की नजर

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जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में गांवों के सामाजिक ढांचे में हो रहे बदलाव को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में चौंकाने वाले संकेत सामने आए हैं। कच्चे घरों वाले आदिवासी गांवों के बीच तेजी से बने पक्के चर्च अब चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि, इन निर्माणों के पीछे विदेशी फंडिंग का नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। ईडी की प्रारंभिक जांच में अमेरिकी मिशनरी नेटवर्क “द टिमोथी इनिशिएटिव” (TTI) से जुड़े फंड का बस्तर तक संबंध होने के संकेत मिले हैं। बताया जा रहा है कि, बेंगलुरु एयरपोर्ट पर पकड़े गए कुछ संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और डेबिट कार्ड से इस नेटवर्क की कड़ियां जुड़ती हैं।

जांच के अनुसार पिछले कुछ महीनों में बस्तर और आसपास के इलाकों में करीब 6.5 करोड़ रुपये खर्च होने के संकेत मिले हैं, जबकि देशभर में इससे जुड़े नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये के लेनदेन की बात सामने आ रही है। हालांकि संस्था FCRA के तहत पंजीकृत नहीं है, फिर भी फंडिंग गतिविधियां जारी रहने पर सवाल उठ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 10–15 वर्षों में बस्तर में हजारों चर्च बने हैं, जिससे ग्रामीण सामाजिक संरचना में बदलाव देखा जा रहा है। कई गांवों में पारंपरिक देवगुड़ी की जगह चर्च केंद्र बनते जा रहे हैं। ईडी अब इस पूरे फंडिंग नेटवर्क, उसके स्रोत और उपयोग की गहन जांच कर रही है। मामला केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है, जिससे जांच और तेज हो गई है।