शाम की चाय के साथ घर की बनी खस्ता मठरी का स्वाद हर किसी को पसंद आता है। इसका कुरकुरा और नमकीन स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को आकर्षित करता है। आमतौर पर मठरी मैदा से बनाई जाती है, लेकिन सेहत को ध्यान में रखते हुए कई लोग मैदा से परहेज करने लगे हैं। ऐसे में गेहूं के आटे से बनी मठरी एक बेहतर और हेल्दी विकल्प साबित हो सकती है। लोगों के बीच यह धारणा बनी रहती है कि केवल मैदा से ही मठरी में खस्तापन आता है, लेकिन ऐसा नहीं है। सही तरीका और कुछ खास सामग्री का इस्तेमाल करके गेहूं के आटे से भी उतनी ही खस्ता और कुरकुरी मठरी तैयार की जा सकती है, जितनी बाजार या हलवाई की दुकानों पर मिलती है। गेहूं के आटे से मठरी बनाने के लिए सबसे जरूरी है आटे की सही तैयारी। आटे में हल्का सा घी या तेल मिलाकर उसे अच्छी तरह मोड़ा जाता है, जिससे मठरी का टेक्सचर कुरकुरा बनता है। इसके अलावा अजवाइन, नमक और हल्के मसालों का इस्तेमाल स्वाद को और बढ़ा देता है। मठरी के डो को तैयार करते समय पानी बहुत सावधानी से डालना चाहिए। सख्त आटा मठरी को खस्ता बनाने में मदद करता है। आटे को गूंथने के बाद कुछ समय के लिए ढककर छोड़ देना भी जरूरी होता है, ताकि यह अच्छे से सेट हो सके।
मठरी को बेलते समय उसे ज्यादा पतला नहीं करना चाहिए। मध्यम मोटाई की मठरी तलने पर ज्यादा कुरकुरी बनती है। साथ ही तेल को सही तापमान पर गर्म करना भी बहुत जरूरी है। अगर तेल बहुत ज्यादा गर्म होगा तो मठरी बाहर से जल सकती है और अंदर से कच्ची रह सकती है। धीमी आंच पर मठरी को तलने से उसका खस्तापन बढ़ जाता है और वह लंबे समय तक कुरकुरी बनी रहती है। इसे एक बार अच्छे से ठंडा होने के बाद एयरटाइट कंटेनर में रखा जा सकता है, जिससे यह कई दिनों तक ताजा बनी रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, गेहूं के आटे से बनी मठरी न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि यह मैदा की तुलना में ज्यादा हेल्दी भी होती है। इसमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन के लिए बेहतर माना जाता है। कुल मिलाकर, अगर सही तरीके और थोड़ी सावधानी के साथ गेहूं के आटे से मठरी बनाई जाए, तो यह मैदा वाली मठरी को भी टक्कर दे सकती है। ऐसे में अगली बार जब भी आप चाय के साथ स्नैक बनाने का सोचें, तो गेहूं के आटे की खस्ता मठरी जरूर ट्राई करें।
