बिजली वितरण में निजी भागीदारी पर सरकार घिरी, बोले—उपभोक्ताओं से होगी भारी वसूली

Follow Us

रायपुर । छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सरकार ने इसके लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है और कमेटी ने राजधानी रायपुर में समाज प्रमुखों एवं प्रबुद्धजनों के साथ बैठक कर सुझाव लिए हैं। हालांकि, यूसीसी को लेकर प्रदेश में सियासी घमासान शुरू हो गया है।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने यूसीसी का कड़ा विरोध करते हुए इसे आदिवासी हितों के खिलाफ बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूसीसी लागू होने से आदिवासियों के हितों और अधिकारों का हनन होगा। बैज ने इसे आरएसएस की ओर से आदिवासियों के खिलाफ किया जा रहा षड्यंत्र भी बताया।
हालांकि, सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि आदिवासी वर्ग को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा। इसके बावजूद कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति साफ कर दी है।

रायपुर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: चाकू लेकर घूमने वालों से लेकर गांजा और सट्टा तक, 9 मामलों में कार्रवाई

वहीं, छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण में निजी भागीदारी को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है। दीपक बैज ने कहा कि एक निजी कंपनी े राजधानी क्षेत्र में बिजली वितरण के लिए लाइसेंस मांगा है। उनका आरोप है कि सरकार निजी कंपनियों को बिजली वितरण की जिम्मेदारी देकर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की तैयारी कर रही है।

बैज ने कहा कि कांग्रेस बिजली वितरण में निजी भागीदारी का हर मोर्चे पर विरोध करेगी। जानकारी के मुताबिक, टाटा कंपनी ने राजधानी क्षेत्र में बिजली वितरण के लिए लाइसेंस की अनुमति मांगी है।
इस तरह यूसीसी और बिजली वितरण में निजी भागीदारी के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ की सियासत एक बार फिर गरमा गई है।