रायपुर। सरकार को गरीब बच्चो की शिक्षा की चिंता नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि आर.टी.ई में बच्चों की भर्ती का मामला अधर में पड़ा हुआ है। सरकार बच्चों का एडमीशन हो इसलिये कोई प्रयास नहीं कर रही है। जबकि बच्चों का एडमीशन स्कूलों में हो, शिक्षा के अधिकार के तहत अधिकांश उनको शिक्षा प्राप्त हो यह सुनिश्चित करने की अब जवाबदारी राज्य सरकार की है। साय सरकार उदासीन बनी हुई है। सरकार हठ धर्मिता छोड़े तथा निजी स्कूलो से बातचीत कर मामले का समाधान निकाले। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि सरकार तुरंत प्राइवेट स्कूल के प्रतिनिधियों से बात करे, गतिरोध समाप्त करें, ताकि बच्चों का एडमिशन हो सके। कांग्रेस की यूपीए सरकार ने गरीबों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने आर.टी.ई. लेकर आई थी, भाजपा सरकार उसमें अवरोध पैदा कर रही।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि निजी स्कूल वालो की मांग पर विचार करें, उनका कहना है वर्षो से उनकी फीस नहीं बढ़ाई गयी है जबकि खर्चे बढ़ गये है। 11 सालो से कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई है। सरकार उनकी मांगो को मानने के बजाय धमकी चमकी पर उतर आई है। निजी स्कूलों ने भी सरकार के खिलाफ आंदोलनरत है। असहयोग आंदोलन चला रहे है, फीस बढ़ोतरी नहीं होने पर गरीब बच्चों को आरटीई के तहत भर्ती नहीं करने की घोषणा कर दी है। ऐसे में सरकार को हठधर्मिता त्याग कर निजी स्कूलों से चर्चा करना चाहिये। इस साल आरटीई की सीटों में 70 प्रतिशत की कटौती यह सरकार कर रही है ताकि पैसा कम देना पड़े, भले ही गरीब बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाये।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पहले आरटीई के भर्ती नियम में बदलाव कर निजी स्कूलों में नर्सरी को नही बल्कि पहली कक्षा को प्रवेश कक्षा माना गया जो सरासर गलत है। जबकि स्कूल की प्रथम कक्षा अगर नर्सरी है तो भर्ती उसी कक्षा से शुरू होगी। क्योंकि निजी स्कूलों में जो बच्चे खुद के खर्च से नर्सरी में भर्ती होते है वो प्रगति करते हुए पीपी वन/टू के बाद क्लास वन में पहुँचते है। जब क्लास वन की सीट पूर्व से शिक्षा ले रहे पीपी टू के बच्चां से भर जायेगी ऐसे में आरटीई के तहत गरीबो बच्चों के लिए सीट कहां बचेगा?
