कबीरधाम। जिले के ग्रामीण अंचल के सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले गणित के व्याख्याता और शासकीय हाई स्कूल छिरहा के प्राचार्य डॉ. रमेश चन्द्रवंशी ने शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियों और नवाचारों की ऐसी मिसाल कायम की है, जो दूसरे शिक्षकों के लिए प्रेरणा बन गई है। 27 साल से अधिक की शिक्षकीय सेवा में उन्होंने अकादमिक उपलब्धियों के साथ स्कूल में कई ऐसे प्रयोग किए, जिनका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिल रहा है।
डॉ. चन्द्रवंशी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में एक ही विश्वविद्यालय से 13 अलग-अलग विषयों में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल करना है। उन्होंने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर से गणित, शिक्षा, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, इतिहास, हिंदी साहित्य, समाजशास्त्र, लोक प्रशासन, भूगोल, दर्शनशास्त्र, प्राचीन भारतीय इतिहास, भाषाविज्ञान और अंग्रेजी में पीजी किया है। इस उपलब्धि के लिए उनका नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होने का दावा किया गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, दीर्घकालिक सेवा और अकादमिक उपलब्धियों के लिए डॉ. चन्द्रवंशी को वर्ष 2025 में शिक्षक दिवस पर राजभवन रायपुर में आयोजित समारोह में तत्कालीन राज्यपाल रामेन डेका के हाथों राज्य शिक्षक सम्मान और श्री गजानन माधव मुक्तिबोध स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वे छत्तीसगढ़ में राज्य स्तर के इन दोनों शिक्षक सम्मानों से एक साथ सम्मानित होने वाले पहले शिक्षक हैं।
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बच्चों के बस्ते का वजन किया कम
छिरहा स्कूल में विद्यार्थियों को भारी स्कूल बैग से राहत देने के लिए प्रत्येक विद्यार्थी की टेबल में सभी विषयों की पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। इससे बच्चों को स्कूल आने-जाने के दौरान किताबों से भरा भारी बस्ता लेकर चलने की जरूरत नहीं पड़ती। विद्यार्थी स्कूल में सिर्फ एक कॉपी और पेन लेकर आते हैं।
गणित के डर को मेले से किया दूर
ग्रामीण बच्चों में गणित के प्रति डर कम करने के लिए स्कूल में गणित मेले का आयोजन किया गया। इसमें खेल-खेल में और टीएलएम के माध्यम से गणित के कठिन सिद्धांतों को आसान तरीके से समझाया गया। स्कूल प्रबंधन का दावा है कि छिरहा जिले का ऐसा गणित मेला आयोजित करने वाला पहला स्कूल बना।
11 साल से घर-घर पहुंच रहे शिक्षक
डॉ. चन्द्रवंशी का नवाचार स्कूल तक सीमित नहीं है। वर्ष 2015 से वे स्कूल के पोषक क्षेत्र के गांवों में जाकर पालकों से सीधे संवाद कर रहे हैं। छिरहा सहित आसपास के गांवों में घर-घर संपर्क कर बच्चों को नियमित स्कूल भेजने, ड्रॉपआउट रोकने और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।वहीं, वर्ष 2015 से अब तक स्कूल में 18 वृहद पालक-शिक्षक बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। स्कूल के अनुसार, करीब 200 विद्यार्थियों में औसतन 100 से अधिक पालक बैठकों में शामिल होते हैं। सरकारी स्कूलों में पालकों की कम भागीदारी की धारणा को बदलने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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