कोयला गैसीकरण योजना पर मंत्रालय का स्पष्टीकरण, आवेदन प्रक्रिया अभी जारी

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37,500 करोड़ रुपये की योजना के लिए आवेदन नहीं मिलने की खबरें समय से पहले : कोयला मंत्रालय

नई दिल्ली । कोयला मंत्रालय ने सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना के तहत आवेदन नहीं मिलने संबंधी खबरों को समय से पहले और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि योजना की पहली आवेदन अवधि अभी समाप्त नहीं हुई है और आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 7 सितंबर 2026 निर्धारित है। ऐसे में आवेदन प्रक्रिया पूरी होने से पहले भागीदारी के स्तर पर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 13 मई 2026 को सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने की योजना को मंजूरी दी थी। योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 37,500 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य देश में कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण को बढ़ावा देना तथा घरेलू कोयला और लिग्नाइट को सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया और यूरिया जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों में बदलने की प्रक्रिया को गति देना है।मंत्रालय के अनुसार, योजना से मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण में घरेलू संसाधनों का अधिक उपयोग सुनिश्चित करने, आयातित कच्चे माल पर निर्भरता कम करने तथा देश की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

उद्योग जगत से लगातार किया गया संपर्क
योजना को मंजूरी मिलने के बाद कोयला मंत्रालय ने संभावित परियोजना विकासकर्ताओं और अन्य हितधारकों के साथ लगातार संपर्क किया। उद्योग जगत में योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने और भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए 28 मई को नई दिल्ली, 11 जून को हैदराबाद और 18 जून 2026 को मुंबई में रोड शो आयोजित किए गए।इन कार्यक्रमों में राज्य सरकारों, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की कंपनियों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, निवेशकों, वित्तीय संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी इन आयोजनों में मौजूद रहे।

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7 जुलाई को जारी हुआ प्रस्ताव के लिए अनुरोध
मंत्रालय ने बताया कि योजना के तहत प्रस्ताव आमंत्रित करने के लिए 7 जुलाई 2026 को प्रस्ताव के लिए अनुरोध जारी किया गया। इसके बाद आवेदन जमा करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया।संभावित आवेदकों को योजना के प्रावधानों, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित जानकारी एवं स्पष्टीकरण देने के लिए 20 जुलाई 2026 को पूर्व-आवेदन सम्मेलन भी आयोजित किया गया। इसमें संभावित आवेदकों ने विभिन्न प्रावधानों को लेकर सवाल पूछे और मंत्रालय से स्पष्टीकरण प्राप्त किया।

टीएफएल और एनटीपीसी ने जमा किए आवेदन
मंत्रालय ने कहा कि हितधारकों के साथ हुई बातचीत के आधार पर उसे जानकारी मिली है कि तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड और एनटीपीसी लिमिटेड ने ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने-अपने आवेदन जमा कर दिए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि योजना के तहत कोई आवेदन नहीं मिला है, यह दावा सही नहीं है।मंत्रालय ने बताया कि कई अन्य संभावित आवेदकों के साथ भी लगातार संपर्क किया जा रहा है। ये कंपनियां परियोजनाओं की तैयारी और आवेदन को अंतिम रूप देने के अलग-अलग चरणों में हैं।

बड़ी परियोजनाओं के लिए व्यापक तैयारी जरूरी
मंत्रालय ने कहा कि प्रस्तावित कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाएं बड़े पैमाने और जटिल प्रकृति की हैं। ऐसे में संभावित आवेदकों को आवेदन से पहले पर्याप्त तैयारी करनी पड़ती है। इसमें पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करना, तकनीकी विकल्पों का आकलन, कोयला, लिग्नाइट और अन्य कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के विकल्प तलाशना, परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता का मूल्यांकन तथा विस्तृत परियोजना प्रस्ताव तैयार करना शामिल है।
मंत्रालय को उम्मीद है कि आवेदन की अंतिम तिथि नजदीक आने के साथ कई अन्य संभावित आवेदक अपनी तैयारियां पूरी कर प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं।

आवेदन के लिए लगातार मिलेंगे अवसर
मंत्रालय ने बताया कि योजना में उद्योग जगत को भागीदारी के कई अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। आवेदन प्रक्रिया लगातार चलती रहेगी। एक चरण की आवेदन अवधि समाप्त होने के अगले दिन से ही अगला चरण शुरू हो जाएगा, जो दो महीने तक खुला रहेगा।इस व्यवस्था का उद्देश्य उन कंपनियों को भी पर्याप्त अवसर देना है, जिन्हें परियोजना की तैयारी पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता हो सकती है। मंत्रालय के अनुसार, बड़े पैमाने की गैसीकरण परियोजनाओं में व्यापक तकनीकी तैयारी और भारी निवेश की जरूरत को देखते हुए यह निरंतर आवेदन प्रक्रिया सोच-समझकर तैयार की गई है।

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25 परियोजनाओं में 3 लाख करोड़ रुपये तक निवेश की उम्मीद
कोयला मंत्रालय को योजना में उद्योग जगत की अच्छी भागीदारी की उम्मीद है। मंत्रालय के अनुसार, इस पहल के तहत लगभग 25 परियोजनाओं में 2.5 लाख करोड़ रुपये से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश होने की संभावना है। इससे लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।यह योजना वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करने के सरकार के व्यापक लक्ष्य में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

समय से पहले निष्कर्ष निकालना उचित नहीं
कोयला मंत्रालय ने दोहराया कि योजना अभी कार्यान्वयन के शुरुआती चरण में है और पहली आवेदन अवधि 7 सितंबर 2026 तक खुली है। इसलिए आवेदन प्रक्रिया पूरी होने से पहले योजना को ‘कोई भागीदारी नहींÓ बताना उचित नहीं है।मंत्रालय ने कहा कि योजना की सफलता और उद्योग की भागीदारी का वास्तविक आकलन निर्धारित आवेदन प्रक्रिया और आगे के चरणों के पूरा होने के बाद ही किया जाना चाहिए। मंत्रालय को भरोसा है कि उद्योग जगत की निरंतर भागीदारी से देश में कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण के विकास को महत्वपूर्ण गति मिलेगी।