रात 2 बजे काजल-लिपस्टिक लगाने पर तलाक की मांग! हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, कहा- यह मानसिक बीमारी का सबूत नहीं

Follow Us

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी महिला का देर रात सजना-संवरना उसे मानसिक रूप से बीमार साबित नहीं करता। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी व्यवहार या आदत के आधार पर किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

मामला उस समय चर्चा में आया जब एक पति ने पत्नी से तलाक की मांग करते हुए दावा किया कि शादी के बाद एक रात करीब 2 बजे उसने पत्नी को काजल और लिपस्टिक लगाते देखा था। पति ने इसी घटना को आधार बनाकर पत्नी की मानसिक स्थिति पर संदेह जताया था। हालांकि, हाईकोर्ट की पीठ ने कहा कि पति अपने आरोपों के समर्थन में कोई मेडिकल रिपोर्ट, मनोचिकित्सक की राय या विशेषज्ञ प्रमाण पेश नहीं कर सका। अदालत ने माना कि सिर्फ आशंका या व्यक्तिगत सोच के आधार पर किसी को मानसिक रोगी नहीं कहा जा सकता।

कोर्ट ने गिरिडीह फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पति की तलाक याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मानसिक बीमारी को तलाक का आधार बनाने के लिए ठोस चिकित्सीय प्रमाण जरूरी हैं। सुनवाई के दौरान पत्नी ने दहेज उत्पीड़न का आरोप भी लगाया था। हाईकोर्ट ने कहा कि पति न तो मानसिक बीमारी साबित कर पाया और न ही पत्नी के खिलाफ लगाए गए आरोपों के पर्याप्त सबूत दे सका।