नई दिल्ली। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-जंतर आंदोलनरत छात्रों ने जश्न मनाया। दिल्ली मेट्रो ने मंडी हाउस, राजीव चौक और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन के एंट्री गेट खोल दिए हैं। लोग जंतर-जंतर से अपने घरों के लिए जाने लगे हैं लेकिन बहुत सारे प्रदर्शनकारी छात्र अब भी वहां मौजूद हैं और कॉकरोच जनता पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं फिलहाल सीजेपी डेलिगेशन की सरकार के प्रतिनिधियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में बैठक चल रही है। जंतर-जंतर पर अपील की जा रही है कि सरकार ने आपकी सभी मांगें मान ली हैं, अब आप घर जाइए।
राहुल गांधी बोले
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर राहुल गांधी ने आंदोलनकारी छात्रों को बधाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारी शिक्षा प्रणाली को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है. शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है. सड़कों पर आकर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डटकर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई।
इसके साथ ही उन्होंने लिखा,
‘2 मांगें अभी भी बाकी हैं – प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो.’ राहुल गांधी ने लिखा, ‘ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है – अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है। इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया. उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों के भविष्य की रक्षा करने और राष्ट्रविरोधी ताकतों को दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे व्यापक छात्र आंदोलन का फायदा उठाने से रोकने के लिए लिया गया है. मोदी सरकार में किसी वरिष्ठ मंत्री का लंबे समय तक चले जन आंदोलन और राजनीतिक दबाव के बीच इस्तीफा देना बेहद दुर्लभ माना जा रहा है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ही थी। तीसरे दौर की वार्ता से कुछ घंटे पहले प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने इस्तीफे की घोषणा की इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं ने साफ कर दिया था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनके लिए गैर-समझौतावादी (Non-negotiable) मुद्दा है। धर्मेंद्र प्रधान के लंबे सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। यही वह स्थान है, जहां सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आमरण अनशन शुरू किया था और आंदोलन का केंद्र बना हुआ था।
सूत्रों के मुताबिक,
धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है, उन्हें पद से हटाया नहीं गया। इससे संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार उन्हें सम्मानजनक विदाई देना चाहती थी। ओडिशा से आने वाले भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान पहली बार 2021 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री बने थे और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद उन्हें दोबारा इसी मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। उधर, आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
केंद्रीय कैबिनेट ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक से जुड़े मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान करने वाले संशोधन विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित संशोधन के तहत संगठित पेपर लीक के मामलों में 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारियों से जुड़ी घटनाएं भी लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। आंदोलन, सरकार के फैसलों, बैठकों और जंतर-मंतर से जुड़े हर बड़े अपडेट के लिए इस लाइव ब्लॉग के साथ जुड़े रहिए।

