वन शहीदों को CM हिमंता की श्रद्धांजलि, ‘वन दुर्गा’ की भूमिका को बताया अहम; बोली- जंगलों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी

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दिसपुर। राष्ट्रीय वन शहीद दिवस के मौके पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले वनकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि राज्य वन सुरक्षा को मजबूत करने और वन्यजीवों व प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि वे उन सभी वनकर्मियों को नमन करते हैं, जिन्होंने जंगलों, वन्यजीवों और प्राकृतिक विरासत की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि इन वन शहीदों का बलिदान असम के जंगलों की सुरक्षा में मौजूद जोखिमों की याद दिलाता है।

वन बल को मजबूत करने पर जोर
सीएम सरमा ने कहा कि असम वन शहीदों के साहस और समर्पण को आगे बढ़ाने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए जंगलों को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने राज्य के वन बल को मजबूत करने के साथ-साथ ‘वन दुर्गा’ पहल के जरिए महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण पर भी जोर दिया।

‘वन दुर्गा’ निभा रहीं अहम जिम्मेदारी
असम की वन सुरक्षा रणनीति में ‘वन दुर्गा’ टीमों के जरिए अग्रिम मोर्चे पर महिलाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन टीमों की जिम्मेदारियों में संवेदनशील वन क्षेत्रों में गश्त, निगरानी में सहयोग, वन अपराधों की सूचना देना, वन्यजीव संरक्षण में सहायता और संरक्षित क्षेत्रों में लगातार फील्ड मौजूदगी बनाए रखना शामिल है।मुख्यमंत्री द्वारा साझा की गई तस्वीरों में ‘वन दुर्गा’ कर्मी जंगलों में फील्ड ड्यूटी करती नजर आईं। वे गश्त और वन सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए तैनात थीं।

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असम में राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व का बड़ा नेटवर्क
असम में वन्यजीवों और प्राकृतिक संपदा के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, टाइगर रिजर्व और हाथी रिजर्व का व्यापक नेटवर्क मौजूद है।राज्य वन विभाग के अनुसार, असम में 5 राष्ट्रीय उद्यान, 20 वन्यजीव अभयारण्य, 3 टाइगर रिजर्व और 5 हाथी रिजर्व हैं। वन विभाग वनों और वन्यजीवों के आवासों की सुरक्षा व प्रबंधन के साथ वनीकरण, खराब हो चुके जंगलों का पुनरुद्धार, वृक्षारोपण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जैसे कार्य भी करता है।

11 सितंबर को मनाया जाता है वन शहीद दिवस
राष्ट्रीय वन शहीद दिवस हर साल 11 सितंबर को उन वनकर्मियों की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। यह दिन वन सुरक्षा में तैनात कर्मियों के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान को याद करने का अवसर है।