मंदाकिनी नदी किनारे अतिक्रमण पर MP सरकार का एक्शन, 5 सदस्यीय टीम करेगी निर्माण कार्यों की जांच

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सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के किनारे हुए निर्माण कार्यों और अतिक्रमण की जांच के लिए प्रशासन ने पांच सदस्यीय टीम गठित की है। पिछले सप्ताह नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया है। टीम नदी के प्राकृतिक बहाव में बाधा डालने वाले निर्माणों की पहचान करने के साथ ही मंदाकिनी नदी के हाई फ्लड लेवल (HFL) का भी आकलन करेगी।

नियमों का उल्लंघन करने वालों पर होगी कार्रवाई
कलेक्टर सतीश कुमार एस. ने बताया कि मझगवां के एसडीएम की अगुवाई में गठित टीम नदी के किनारे मौजूद निर्माणों और अन्य ढांचों की जांच करेगी। यह भी देखा जाएगा कि कहीं कोई निर्माण नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा तो नहीं डाल रहा है।कलेक्टर ने कहा कि जांच सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की गाइडलाइंस के अनुसार की जाएगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बाढ़ में खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंचा था जलस्तर
28-29 अगस्त की रात आई बाढ़ के दौरान आरोग्यधाम के पास मंदाकिनी नदी का जलस्तर 145.76 मीटर तक पहुंच गया था। जबकि नदी का निर्धारित हाई फ्लड लेवल 139.60 मीटर है। बाढ़ के दौरान हनुमानधारा पुल भी बह गया था, जिसके बाद नदी किनारे निर्माण और अतिक्रमण को लेकर प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

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अवैध प्लॉटिंग और निर्माणों की होगी जांच
पांच सदस्यीय टीम नदी किनारे की जमीन पर हुई अवैध प्लॉटिंग, सरकारी और निजी निर्माणों की जांच करेगी। इसके साथ ही पुराने और जर्जर भवनों को भी चिह्नित किया जाएगा। प्रशासन यह पता लगाएगा कि ये इमारतें निर्धारित सुरक्षा और निर्माण नियमों का पालन करती हैं या नहीं।नदी किनारे हाल में किए गए नए निर्माण और दोबारा बनाए गए भवनों की भी सुरक्षा के लिहाज से जांच होगी।

इन अधिकारियों को टीम में किया गया शामिल
प्रशासन की ओर से गठित टीम में चीफ म्युनिसिपल ऑफिसर, नायब तहसीलदार, लोक निर्माण विभाग (PWD) के एसडीओ, जल संसाधन विभाग के एसडीओ और नगर परिषद के सब-इंजीनियर शामिल हैं।टीम मौके पर जाकर निर्माण कार्यों और अतिक्रमण की स्थिति का आकलन करेगी और अपनी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए सुझाव देगी।

बाढ़ से नुकसान कम करना प्रशासन का मकसद
कलेक्टर ने कहा कि इस पूरी कवायद का उद्देश्य भविष्य में नदी का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्रशासन नदी के प्राकृतिक प्रवाह में किसी भी तरह की बाधा को लेकर गंभीर है।यह कार्रवाई शहरी विकास एवं आवास मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के उस बयान के कुछ दिनों बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मंदाकिनी नदी के बहाव में बाधा डालने वाले सरकारी और निजी अतिक्रमण हटाए जाएंगे।प्रशासन को उम्मीद है कि जांच के बाद नदी किनारे नियमों के उल्लंघन और अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट होगी तथा नदी के प्राकृतिक बहाव को सुरक्षित रखने के लिए आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।