नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के संवेदनशील क्षेत्र छोटेडोंगर में धर्मांतरण को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। स्थानीय स्तर पर उठे इस मुद्दे ने अब सामाजिक और प्रशासनिक चिंता दोनों को बढ़ा दिया है। सर्व आदिवासी समाज और अन्य सामाजिक संगठनों ने हाल ही में बैठक कर इस मामले पर कड़ा विरोध जताया। समाज का आरोप है कि, बाहरी प्रभाव और प्रलोभनों के कारण आदिवासी समुदाय के लोग अपनी पारंपरिक आस्था और संस्कृति से दूर हो रहे हैं, जिससे उनकी सामाजिक पहचान पर असर पड़ रहा है।
बैठक के बाद सर्व आदिवासी समाज ने धर्मांतरित लोगों से ‘घर वापसी’ की अपील करते हुए एक समयसीमा तय की है। समाज ने स्पष्ट कहा है कि, 30 अप्रैल तक यदि लोग स्वेच्छा से अपनी मूल आस्था में वापस नहीं लौटते हैं, तो वे आगे कठोर कदम उठाने पर विचार करेंगे। इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन भी सतर्क हो गया है। छोटेडोंगर और आसपास के अबूझमाड़ क्षेत्र की संवेदनशील स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने अतिरिक्त निगरानी बढ़ा दी है। किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।
यह मुद्दा केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के कई आदिवासी इलाकों में समय-समय पर सामने आता रहा है। जहां एक ओर समुदाय अपनी परंपराओं की रक्षा की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भी बहस जारी है। फिलहाल प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
