नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम आते ही आम के शौकीनों का उत्साह सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। भारत में आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि लोगों की यादों, बचपन के किस्सों और भावनाओं से जुड़ा एक बेमिसाल स्वाद है। हमारे देश में अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और दशहरी जैसी आम की ढेरों किस्में पाई जाती हैं, जिनका इंतजार लोग सालभर करते हैं। वैसे तो गर्मियों में मंडियां और बाजार तरह-तरह के रसीले आमों से पट जाते हैं, लेकिन आजकल लोगों के बीच बाजारों से आम खरीदने के बजाय सीधे बागों में जाकर पेड़ों से आम तोड़कर खाने का एक नया और अनोखा क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। पेड़ से खुद फल तोड़कर खाने का यह अंदाज न केवल स्वाद को दोगुना कर देता है, बल्कि बच्चों और युवाओं के लिए एक रोमांचक और यादगार अनुभव भी साबित हो रहा है।

विशेषज्ञों और आम के प्रेमियों का मानना है कि पेड़ से तुरंत तोड़े गए आम का स्वाद बेहद ताजा, प्राकृतिक और कहीं अधिक मीठा होता है। यह एक्टिविटी लोगों को भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर सीधे प्रकृति के करीब ले जाती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में, जहाँ आम के विशाल बागान हैं, वहां लोग सप्ताहांत (वीकेंड) पर खास तौर पर मैंगो टूरिज्म का लुत्फ उठाने पहुंच रहे हैं। शहरों में भी अब कई किसान सीधे बागों से ताजे आम लाकर बेच रहे हैं, जिससे शहरी उपभोक्ताओं को भी बाग जैसा ही अहसास मिल रहा है। स्वाद और रोमांच के अलावा आम सेहत के लिए भी खजाना है; इसमें मौजूद विटामिन C, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की इम्युनिटी बढ़ाते हैं। कुल मिलाकर, इस बार गर्मियों में आम का यह नया ट्रेंड लोगों की खुशियों और स्वाद के सफर में चार चांद लगा रहा है।
