कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में प्रसूता और नवजात की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भानुप्रतापपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के खण्ड चिकित्सा अधिकारी (BMO) डॉ. शचिन्द्र कुमार गोटा को निलंबित कर दिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर सचिव द्वारा जारी आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई है। विभाग ने यह कदम अस्पताल में उपचार के दौरान लापरवाही बरतने के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए उठाया है।
मामला भानुप्रतापपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है, जहां ग्राम चाहचाड़ निवासी कमलेश कोमरा अपनी गर्भवती पत्नी द्रोपदी कोमरा को प्रसव पीड़ा होने पर 15 मई को अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी गर्भवती महिला के इलाज और देखभाल में लापरवाही बरती गई। परिजनों के अनुसार द्रोपदी कोमरा को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन दो दिन तक उचित उपचार नहीं मिल सका। 17 मई को अस्पताल स्टाफ द्वारा सोनोग्राफी कराने की सलाह दी गई। अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजन महिला को बाइक से निजी अस्पताल लेकर गए।
सोनोग्राफी रिपोर्ट आने के बाद परिजन महिला को वापस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। आरोप है कि उस समय भी महिला दर्द से परेशान थी, लेकिन उसे समय पर आवश्यक उपचार नहीं मिला। परिजनों ने बताया कि डॉक्टर को फोन करने के बाद भी वह समय पर अस्पताल नहीं पहुंचे, जिसके कारण महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। स्थिति गंभीर होने पर परिजन महिला को निजी अस्पताल लेकर गए, जहां देर रात प्रसव कराया गया। प्रसव के बाद जन्मे बच्चे की करीब एक घंटे के भीतर संक्रमण फैलने से मौत हो गई। वहीं कुछ घंटे बाद प्रसूता द्रोपदी कोमरा ने भी दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद मृतका के परिवार में मातम छा गया।
कार्टून कार्यशाला जच्चा और बच्चा दोनों की मौत के बाद परिजनों ने भानुप्रतापपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों और कर्मचारियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए थे। परिवार ने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू की। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भानुप्रतापपुर में भर्ती प्रसूता के इलाज के दौरान लापरवाही बरतने का मामला सामने आया है। इस संबंध में समाचार पत्रों में भी खबर प्रकाशित हुई थी, जिसमें डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे।
आदेश में उल्लेख किया गया कि राज्य शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 (1) (क) के तहत डॉ. शचिन्द्र कुमार गोटा, खण्ड चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भानुप्रतापपुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। निलंबन अवधि के दौरान डॉ. गोटा का मुख्यालय निर्धारित नियमों के अनुसार रहेगा और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। विभाग द्वारा मामले की आगे जांच की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग ने साफ संकेत दिया है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रसूता और नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। कांकेर जिले की इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है। विभाग अब पूरे मामले की जांच कर यह पता लगाएगा कि लापरवाही किन स्तरों पर हुई और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार हैं।
