रियाद। कच्चे तेल के वैश्विक बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सऊदी अरब ने अगस्त महीने के लिए एशियाई ग्राहकों को मिलने वाले अपने प्रमुख ‘अरब लाइट’ कच्चे तेल की कीमत में 11 डॉलर प्रति बैरल तक की कटौती की है। इसे पिछले 26 वर्षों की सबसे बड़ी मूल्य कटौती माना जा रहा है। इस फैसले का सबसे अधिक लाभ उन देशों को मिल सकता है जो सऊदी अरब से बड़ी मात्रा में तेल आयात करते हैं, जिनमें भारत भी प्रमुख है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर उत्पादन बढ़ने और आपूर्ति सामान्य होने से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना है। OPEC+ समूह ने भी अगस्त के लिए उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है, जिससे बाजार में तेल की उपलब्धता और बढ़ेगी। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नरम बनी हुई हैं।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में सस्ता कच्चा तेल देश के आयात बिल को कम कर सकता है और आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि खुदरा ईंधन कीमतों में बदलाव तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति और अन्य आर्थिक कारकों पर भी निर्भर करेगा।
