मोहला। छत्तीसगढ़ शासन की दिव्यांगजन हितैषी योजनाएं जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के ग्राम मंझियापुर निवासी नर्मेश कुमार धावड़े इसकी प्रेरक मिसाल बनकर सामने आए हैं। 76 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अब बैटरी चालित ट्राइसाइकिल के सहारे आत्मनिर्भर जीवन जी रहे हैं।
नर्मेश कुमार गांव में छोटी-सी परचून दुकान संचालित कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। दिव्यांगता के कारण उन्हें आने-जाने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। सामाजिक चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने आत्मविश्वास बनाए रखा और आगे बढ़ने का प्रयास जारी रखा।
इसी दौरान उन्हें समाज कल्याण विभाग की योजना की जानकारी मिली, जिसके तहत 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले पात्र हितग्राहियों को बैटरी चालित ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन किया, जिसे जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग ने स्वीकृति प्रदान करते हुए उन्हें ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई।
ट्राइसाइकिल मिलने के बाद नर्मेश के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। अब वे आसानी से अपनी दुकान तक पहुंच पाते हैं, दैनिक कार्य स्वयं कर लेते हैं और उन्हें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इससे उनकी आय में भी बढ़ोतरी हुई है और परिवार को आर्थिक मजबूती मिली है।
नर्मेश का कहना है कि पहले जहां घर से बाहर निकलना भी चुनौती थी, वहीं अब वे नियमित रूप से अपना काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता कमजोरी नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।
आज नर्मेश अपने क्षेत्र के अन्य दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। वे लोगों को आत्मनिर्भर बनने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने इस बदलाव के लिए छत्तीसगढ़ शासन, जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार जताते हुए कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं ने उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर दिया है।
