धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले अन्ना हजारे: ‘हिंसा नहीं, संवाद और अहिंसक आंदोलन ही लोकतंत्र की असली ताकत’

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नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद समाजसेवी अन्ना हजारे ने छात्रों के आंदोलन और पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि, किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में समस्याओं का स्थायी समाधान हिंसा से नहीं, बल्कि संवाद, शांतिपूर्ण आंदोलन और आपसी समझ से निकलता है।

अन्ना हजारे ने कहा कि, नागरिकों को अपनी मांगें रखने और विरोध दर्ज कराने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसके लिए अहिंसा और लोकतांत्रिक तरीकों का पालन होना चाहिए। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि, जनहित के मुद्दों पर उन्होंने कई बार अनशन और शांतिपूर्ण आंदोलन किए, लेकिन कभी हिंसा का सहारा नहीं लिया।

उन्होंने कहा कि, सरकार और जनता के बीच खुला संवाद ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। यदि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान तलाशें, तो सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। अन्ना हजारे ने यह भी कहा कि, किसी मंत्री के इस्तीफे को जीत या हार के नजरिए से नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा मानना चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार से जनता की वास्तविक चिंताओं को गंभीरता से सुनने और समय पर समाधान निकालने की अपील की।