नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के सुलगते हालात के बीच दुनिया की दो सबसे ताकतवर शख्सियतों ने एक बार फिर हाथ मिलाया है। 14 अप्रैल 2026 की शाम वैश्विक राजनीति के लिए बेहद अहम रही, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन मिलाया। करीब 40 मिनट तक चली इस लंबी बातचीत ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच संघर्ष विराम (Ceasefire) के बावजूद तनाव चरम पर है। ट्रंप की ओर से ईरान को मिल रही लगातार धमकियों ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। ऐसे में ‘इस्लामाबाद टॉक’ के तुरंत बाद ट्रंप का मोदी को कॉल करना यह साफ करता है कि, वैश्विक शांति की चाबी अब भारत के पास है। पीएम मोदी ने ‘X’ पर जानकारी देते हुए बताया कि, चर्चा का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया की अस्थिरता रही। विशेषज्ञों का मानना है कि, ट्रंप चाहते हैं कि, पीएम मोदी अपनी ‘सॉफ्ट पावर’ का इस्तेमाल कर ईरान और इजरायल के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाएं। जहाँ एक तरफ जंग की आहट से कच्चा तेल और शेयर बाजार सहमा हुआ है, वहीं मोदी-ट्रंप की इस जुगलबंदी ने उम्मीद जगाई है कि, शायद भारत के हस्तक्षेप से इस महाविनाश को टाला जा सके। यह सिर्फ एक फोन कॉल नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते दबदबे की गूंज है।
