महिला सशक्तिकरण की ओर बड़ा कदम: नारी शक्ति वंदन अधिनियम से नई उम्मीदें

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रायपुर। भारतीय संस्कृति में नारी को हमेशा से सृजन और शक्ति का प्रतीक माना गया है, लेकिन आधुनिक भारत में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ ने इस श्रद्धा को संवैधानिक अधिकार में बदल दिया है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला यह ऐतिहासिक कानून महज़ एक संशोधन नहीं, बल्कि लोकतंत्र को समावेशी बनाने की दिशा में सबसे बड़ा क्रांतिकारी कदम है।

छत्तीसगढ़, जो अपनी सांस्कृतिक विविधता और मातृसत्तात्मक समाज के लिए पहचाना जाता है, इस बदलाव का अग्रदूत बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने महिलाओं के उत्थान को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है, जिससे प्रदेश की महिलाओं में आत्मविश्वास और स्वाभिमान की एक नई लहर दौड़ गई है।

CM साय का दृष्टिकोण मातृशक्ति के प्रति गहरा सम्मान दर्शाता है, यही कारण है कि, उन्होंने इस वर्ष को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। राज्य में ‘महतारी वंदन योजना’ के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन की नींव पहले ही रखी जा चुकी है और अब राजनीतिक आरक्षण के माध्यम से उन्हें नीति-निर्धारक बनाने की तैयारी है। CM का मानना है कि, अब महिलाएं इतिहास की केवल दर्शक नहीं बनेंगी, बल्कि वे स्वयं इतिहास रचने वाली निर्माता की भूमिका में होंगी।

छत्तीसगढ़ के स्थानीय निकायों में पहले से ही महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है, जिसने पंचायत से लेकर नगर निगम तक महिला नेतृत्व को मजबूती दी है। अब 33 प्रतिशत का यह नया विस्तार महिलाओं की आवाज को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाएगा।

इस अधिनियम से न केवल लोकतंत्र अधिक प्रतिनिधिक बनेगा, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में संवेदनशीलता और गुणवत्ता का भी समावेश होगा। महिलाएं अपने अनुभवों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझती हैं, जिससे बनने वाली नीतियां अधिक प्रभावी और जन-केंद्रित होंगी। आज छत्तीसगढ़ महिला सशक्तिकरण के एक ऐसे मॉडल के रूप में स्थापित हो चुका है, जहाँ केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और अब सत्ता में समान भागीदारी मिल रही है। यह सशक्तिकरण ही एक मजबूत समाज और अंततः एक विकसित राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला बनेगा।