पर्यावरण दिवस पर क्रूर मज़ाक: एक तरफ़ पौधरोपण के दावे, दूसरी तरफ़ धधकती रही बांसला की पहाड़ी

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भानुप्रतापपुर। विश्व पर्यावरण दिवस पर जहाँ पूरा देश पर्यावरण संरक्षण के बड़े-बड़े संकल्प ले रहा था और नेता-अफसर पौधरोपण की तस्वीरें खिंचवा रहे थे, ठीक उसी समय भानुप्रतापपुर वन परिक्षेत्र से आई एक तस्वीर ने इन दावों की कलई खोलकर रख दी। ग्राम बांसला की पहाड़ी पर स्थित हरा-भरा जंगल भीषण आग की लपटों में धधकता रहा और बेशकीमती पेड़ जलकर राख होते रहे।

विडंबना देखिए कि जिस दिन प्रकृति को बचाने के सबसे ज्यादा नारे गूंज रहे थे, उसी दिन वन विभाग की घोर लापरवाही के कारण जंगल खुद को बचाने की गुहार लगा रहा था। ऐसा लग रहा था मानो बांसला की पहाड़ी के पेड़ भी पर्यावरण दिवस मना रहे थे—फर्क सिर्फ इतना था कि शहरों में पौधों को पानी मिल रहा था और यहाँ पेड़ों को आग। जंगलों में जानबूझकर आग लगाने वाले असामाजिक तत्वों की घटिया मानसिकता और वन विभाग की सुस्त निगरानी व्यवस्था के कारण न सिर्फ वनस्पति को भारी नुकसान पहुँचा है, बल्कि बेजुबान वन्यजीवों का जीवन भी संकट में पड़ गया है। कागजी दावों और जमीनी हकीकत का यह अंतर व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान है।