रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की एंट्री होने जा रही है। राज्य का शिक्षा विभाग बच्चों की पठन क्षमता, लेखन कौशल और समझ को बेहतर बनाने के लिए AI आधारित तकनीक लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य पढ़ाई को आसान, प्रभावी और बच्चों के स्तर के अनुसार बनाना है।
इस योजना के तहत AI आधारित एप्लीकेशन बच्चों की सीखने की क्षमता का आकलन करेगा और उसी आधार पर उनके लिए सुधारात्मक रणनीति तैयार की जाएगी। हाल ही में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा तय की गई। शुरुआत में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में दो जिलों में लागू किया जाएगा, जिसके बाद सफल परिणाम मिलने पर पूरे राज्य में विस्तार किया जाएगा।
इस पहल में ‘मौखिक धाराप्रवाह पठन (ORF) टूल’ अहम भूमिका निभाएगा, जिसे वाधवानी एआई के सहयोग से विकसित किया गया है। यह टूल ऑटोमेटिक स्पीच रिकग्निशन (ASR) तकनीक पर आधारित है, जो बच्चों की आवाज को रिकॉर्ड कर उसे टेक्स्ट में बदल देता है। इसके जरिए शिक्षक महज 2 से 3 मिनट में बच्चों की पढ़ने की गति, शुद्धता और समझ का सटीक मूल्यांकन कर सकेंगे।
इस तकनीक को स्थानीय भाषा और बोलियों के अनुरूप बनाने के लिए प्रदेश के 15 जिलों के 300 से अधिक स्कूलों से करीब 200 घंटे का वॉयस डेटा एकत्र किया गया है। इससे टूल की सटीकता और उपयोगिता बढ़ेगी।
इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य कक्षा 3 से 8 तक के बच्चों में बुनियादी साक्षरता को मजबूत करना है, ताकि वे धाराप्रवाह और समझ के साथ पढ़ सकें। इसके साथ ही ‘निपुण भारत मिशन’ के तहत तय किए गए लक्ष्यों को भी हासिल करने में मदद मिलेगी। इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिसमें शिक्षकों को प्रशिक्षण, डिजिटल प्लेटफॉर्म से एकीकरण, बच्चों का बेसलाइन आकलन, समूह आधारित वर्गीकरण, सुधारात्मक शिक्षण और अंत में प्रगति का मूल्यांकन शामिल है।
गौरतलब है कि, इस मॉडल को पहले राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है, जहां लाखों बच्चों को इसका लाभ मिला। इसी सफलता को देखते हुए अब छत्तीसगढ़ में भी इसे बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी है, जिससे आने वाले समय में सरकारी स्कूलों की पढ़ाई में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
