तेहरान, ईरान। अमेरिका ने ईरान के सबसे बड़े बी1 पुल को ध्वस्त कर दिया है, जिसके तुरंत बाद ईरान ने मध्य पूर्व के आठ प्रमुख पुलों की संभावित निशाने की सूची जारी की है। फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, गुरुवार को बी1 पुल पर दो हमलों के बाद खाड़ी देश और जॉर्डन के महत्वपूर्ण पुल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के संभावित लक्ष्यों में शामिल हो सकते हैं। ईरानी मीडिया ने प्रमुख क्षेत्रीय पुलों को संभावित टार्गेट्स के तौर पर लिस्ट किया है. यह कदम तब उठाया गया, जब अमेरिका और इज़रायल के हमलों में करज का B1 पुल नष्ट हो गया. ईरानी मीडिया ने शुक्रवार को मिडिल-ईस्ट के अहम पुलों की एक लिस्ट पब्लिश की है. ऐसा लग रहा था कि यह एक संभावित जवाबी कार्रवाई की चेतावनी थी, क्योंकि एक दिन पहले ही अमेरिका और इज़रायल के हमले में ईरान के करज का एक अहम पुल तबाह हो गया था.
अनादोलू की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सूची में खाड़ी के आठ पुल शामिल हैं जिसमें कुवैत का शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबाह समुद्री पुल; संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के शेख जायद पुल, अल मक़ता पुल और शेख खलीफ़ा पुल; सऊदी अरब को बहरीन से जोड़ने वाला किंग फहद कॉज़वे; साथ ही जॉर्डन के किंग हुसैन पुल, दामिया पुल और अब्दौन पुल हैं।US और इज़रायली सेनाओं ने एक दिन पहले, अल्बोर्ज़ प्रांत में स्थित करज के B1 पुल पर दो हमले किए. इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई और पुल पूरी तरह से तबाह हो गया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा गया कि हमलों के बाद पुल का एक बड़ा हिस्सा ढह गया.

करीब एक हजार मीटर लंबा B1 पुल, ईरान के अहम मॉडर्न इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता है. इसे तेहरान और करज के बीच भीड़ कम करने और देश के उत्तरी क्षेत्रों से कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए बनाया गया था. US राष्ट्रपति ने कहा, “ईरान का सबसे बड़ा पुल ढह गया है, अब इसका दोबारा इस्तेमाल कभी नहीं हो पाएगा. अभी और भी बहुत कुछ होना बाकी है. अब वक्त आ गया है कि ईरान कोई समझौता कर ले, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए और उस देश का कुछ भी न बचे जो अभी भी एक महान देश बन सकता है.”
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें दिखाया गया था कि उसी दिन पहले हुए एक हवाई हमले के बाद पुल में आग लग गई और उससे घना धुआं निकलने लगा. US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक बड़ा मैसेज दिया और चेतावनी दी है कि इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, कोई समझौता कर लिया जाए.ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक पोस्ट में कहा, अधूरे पुलों समेत नागरिक ढांचों पर हमला करने से ईरानी आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर नहीं होंगे। यह तो केवल एक बिखरे हुए दुश्मन की हार और मनोबल के पतन को दर्शाता है।
