आजकल बेहतर सेहत के नाम पर एवोकाडो, चिया सीड्स, क्विनोआ और केल जैसे विदेशी खाद्य पदार्थों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। हेल्थ डाइट और फिटनेस के नाम पर लोग इन महंगे खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं। लेकिन क्या बेहतर पोषण के लिए महंगे और आयातित सुपरफूड्स जरूरी हैं? विशेषज्ञों के मुताबिक, इसका जवाब है नहीं। हमारी पारंपरिक भारतीय रसोई में पहले से ही ऐसे कई पौष्टिक खाद्य पदार्थ मौजूद हैं, जो पोषण के मामले में विदेशी सुपरफूड्स के अच्छे विकल्प हो सकते हैं।
एमएमआई नारायणा अस्पताल, रायपुर की चीफ क्लिनिकल डाइटिशियन एवं क्लिनिकल न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स विशेषज्ञ जूली पांडे के अनुसार, ‘सुपरफूड’ कोई वैज्ञानिक शब्द नहीं, बल्कि मुख्य रूप से मार्केटिंग से जुड़ा शब्द है। किसी एक खाद्य पदार्थ से संपूर्ण स्वास्थ्य की गारंटी नहीं मिलती। बेहतर सेहत के लिए ऐसा संतुलित आहार जरूरी है, जिसमें प्रोटीन, फाइबर, स्वस्थ वसा, विटामिन और खनिज पर्याप्त मात्रा में हों तथा प्रोसेस्ड फूड और रिफाइंड शुगर सीमित हो।
विशेषज्ञ के मुताबिक, रागी, बाजरा, ज्वार और कंगनी जैसे पारंपरिक अनाज फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों के अच्छे स्रोत हैं। रागी में कैल्शियम और बाजरे में आयरन पाया जाता है। ये अनाज रोजमर्रा के भोजन में शामिल किए जा सकते हैं। इसी तरह दाल, राजमा, चना और मूंग प्रोटीन व फाइबर की जरूरत पूरी करने में मदद करते हैं। भुने चने से तैयार सत्तू भी कम कीमत में मिलने वाला पौष्टिक विकल्प है।
चिया सीड्स की जगह अलसी, तिल, सरसों के दाने और मूंगफली को भी आहार में शामिल किया जा सकता है। वहीं, केल जैसी विदेशी पत्तेदार सब्जियों के बजाय पालक, मेथी, सरसों का साग, चौलाई और सहजन के पत्ते पोषण के अच्छे स्रोत हैं। इनमें आयरन, फोलेट, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं।
भारतीय खानपान में दही, छाछ, इडली, डोसा और कांजी जैसे पारंपरिक किण्वित खाद्य पदार्थ भी महत्वपूर्ण हैं। ये आंतों की सेहत के लिए लाभकारी सूक्ष्मजीवों का स्रोत हो सकते हैं। इसके अलावा हल्दी, अदरक, जीरा, अजवाइन और मेथी जैसे मसाले तथा आंवला, अमरूद, जामुन और पपीता जैसे मौसमी फल भी पोषण में अहम योगदान देते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक संतुलित भारतीय थाली में साबुत अनाज या मिलेट्स, दाल या फलियां, मौसमी सब्जियां, हरी पत्तेदार सब्जियां, दही या छाछ और सीमित मात्रा में स्वस्थ वसा शामिल होनी चाहिए। खानपान में मछली, अंडे या कम वसा वाला मांस लेने वाले लोग इन्हें भी अपनी जरूरत के अनुसार शामिल कर सकते हैं।
डाइटिशियन जूली पांडे का कहना है कि विदेशी खाद्य पदार्थों को पूरी तरह गलत मानने की जरूरत नहीं है, लेकिन बेहतर स्वास्थ्य के लिए महंगे सुपरफूड्स पर निर्भर रहना भी जरूरी नहीं। स्थानीय, मौसमी और कम प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को संतुलित मात्रा में खाने से भी अच्छा पोषण मिल सकता है। सही आहार वही है, जो पौष्टिक होने के साथ किफायती, टिकाऊ और हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली के अनुकूल हो।
