मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर । छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में है। ताजा मामला जिला मुख्यालय मनेन्द्रगढ़ स्थित जल संसाधन विभाग के कार्यालय का है, जहाँ ‘साहब की कुर्सी अक्सर खाली ही नजर आती है। विभागीय लापरवाही और अधिकारियों की इस गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली से क्षेत्र के किसान और आम नागरिक बुरी तरह परेशान हैं।
दफ्तर खुला, लेकिन जिम्मेदार गायब स्थानीय शिकायतों के मुताबिक, मनेन्द्रगढ़ संभाग के कार्यपालन अभियंता और संबंधित अनुविभागीय अधिकारी नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते हैं। दफ्तर में केवल छोटे कर्मचारी ही मौजूद मिलते हैं, जिनके पास जनता की समस्याओं या फाइलों को आगे बढ़ाने का कोई ठोस अधिकार नहीं होता।
दूर से आए ग्रामीण वे अपनी समस्याओं, जैसे- सिंचाई परियोजनाओं, बांधों के रखरखाव और मुआवजा संबंधी मामलों को लेकर दूर-दराज के गांवों से किराया खर्च कर जिला कार्यालय पहुंचते हैं। लेकिन घंटों इंतजार करने के बाद भी अधिकारियों से मुलाकात नहीं हो पाती। नियमित रूप से अधिकारियों की मौजूदगी न होने के कारण:विभागीय फाइलों का काम पूरी तरह अटक गया है।क्षेत्र में चल रही सिंचाई परियोजनाओं की निगरानी प्रभावित हो रही है।
आम जनता को एक छोटे से काम या जानकारी के लिए दफ्तर के बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं।क्या इस ओर ध्यान देगा जिला प्रशासन?मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के जिला बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि प्रशासनिक व्यवस्था सुधरेगी और उनके काम आसानी से होंगे। लेकिन जल संसाधन विभाग की यह जमीनी हकीकत प्रशासन के दावों की पोल खोल रही है। कलेक्टर और उच्चाधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है, ताकि दफ्तरों में अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित की जा सके और मनमानी करने वाले अधिकारियों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
