शिकारियों पर शिकंजा कसने इंद्रावती टाइगर रिजर्व में मॉक ड्रिल, खोजी कुत्ते से वन अपराध जांच की ट्रेनिंग

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बीजापुर। वन्यप्राणियों की सुरक्षा और वन अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए इंद्रावती टाइगर रिजर्व में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में पिल्लूर परिक्षेत्र में वन विभाग के अधिकारियों और नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी के सदस्यों की मौजूदगी में मैदानी कर्मचारियों के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की गई। अभ्यास के दौरान वन अमले और सुरक्षा श्रमिकों को शिकार की सूचना मिलने से लेकर घटनास्थल तक पहुंचने, मौके की जांच करने, साक्ष्य जुटाने और संदिग्धों की तलाश करने जैसी परिस्थितियों में कार्रवाई का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। खोजी कुत्ते की मदद से वन अपराध की जांच करने की प्रक्रिया का भी अभ्यास कराया गया। यह प्रशिक्षण हाल ही में आयोजित एंटी स्नेयर वॉक और टाइगर मॉनिटरिंग कार्यशाला की अगली कड़ी के रूप में कराया गया।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में फिलहाल एक प्रशिक्षित ट्रैकिंग डॉग उपलब्ध है। विभागीय गतिविधियों में शामिल किए जाने से पहले उसे चंडीगढ़ में आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया है। अब इसका इस्तेमाल वन अपराधों की जांच और वन गश्ती के दौरान किया जाएगा। मॉक ड्रिल के दौरान कर्मचारियों को अलग-अलग टीमों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने और वास्तविक परिस्थितियों में तेजी से कार्रवाई करने का अभ्यास कराया गया। वन क्षेत्र में शिकार और अन्य अपराधों पर नजर रखने के लिए एंटी स्नेयर वॉक और गश्ती गतिविधियों में भी लगातार बढ़ोतरी की जा रही है। भविष्य में डॉग स्क्वाड में और प्रशिक्षित खोजी कुत्तों को शामिल करने की योजना है।

क्षेत्रीय निदेशक इंद्रावती टाइगर रिजर्व उत्तम गुप्ता ने कहा कि वन्यप्राणियों की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी उद्देश्य से मैदानी अमले को आधुनिक तकनीक के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं उप निदेशक सुमेध संजय सुरवाडे ने बताया कि टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था में नई तकनीकों को शामिल करने की पहल की गई है। मैदानी कर्मचारियों को तकनीकी और व्यावहारिक रूप से सक्षम बनाने के लिए इस तरह के प्रशिक्षण आगे भी जारी रखे जाएंगे।