नई दिल्ली। भारतीय सेना की एंटी-टैंक क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में भारत और अमेरिका के बीच जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम की खरीद को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। यह अत्याधुनिक हथियार सेना को पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में भी दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ अधिक प्रभावी बढ़त दिला सकता है। जैवलिन एक फायर-एंड-फॉरगेट मिसाइल है, जिसे एक सैनिक आसानी से लॉन्च कर सकता है। मिसाइल दागने के बाद ऑपरेटर को लक्ष्य पर नजर बनाए रखने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि यह खुद लक्ष्य को ट्रैक करती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत टॉप-अटैक तकनीक है, जिससे यह टैंक के कमजोर ऊपरी हिस्से पर हमला करती है।
करीब 65 मीटर से 4 किलोमीटर तक मार करने वाली यह मिसाइल दिन-रात और हर मौसम में काम करने में सक्षम है। इसमें इमेजिंग इन्फ्रारेड सीकर और टैंडम वॉरहेड जैसी आधुनिक तकनीकें शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका पहले ही भारत के लिए जैवलिन सिस्टम की संभावित बिक्री को मंजूरी दे चुका है। इस सौदे का एक अहम पहलू भविष्य में भारत में सह-उत्पादन (को-प्रोडक्शन) की संभावना भी है, जिससे रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ को नई मजबूती मिल सकती है और दोनों देशों की रक्षा साझेदारी भी और गहरी होगी।
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