बालको में महिला इंजीनियरों ने बदली तस्वीर, तकनीकी दक्षता और नेतृत्व से लिख रहीं सफलता की नई कहानी

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कोरबा। मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री में कभी इंजीनियरिंग और तकनीकी जिम्मेदारियों को मुख्य रूप से पुरुषों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन बदलते समय के साथ महिला इंजीनियरों ने इस सोच को पीछे छोड़ते हुए अपनी मजबूत पहचान बनाई है। बालको में महिला इंजीनियर उत्पादन, खनन, प्रचालन और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते हुए कंपनी की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। तकनीकी कौशल, नेतृत्व क्षमता और दृढ़ संकल्प के साथ वे कार्यस्थल पर नई मिसाल कायम कर रही हैं। मशीनों और आधुनिक तकनीक के बीच जिम्मेदारी निभाने से लेकर टीमों का नेतृत्व करने तक, महिला इंजीनियरों ने साबित किया है कि सफलता और क्षमता किसी लैंगिक सीमा की मोहताज नहीं है। चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए वे अपने करियर में आगे बढ़ने के साथ ही मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में आने वाली नई पीढ़ी की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रही हैं।


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आईपीएस एकेडमी, इंदौर से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने वाली अंशिका सिंह को शुरुआत से ही तकनीकी क्षेत्र में विशेष रुचि थी। बालको से जुड़ने के बाद उनकी यह रुचि आत्मविश्वास और उपलब्धियों में बदल गई। एल्यूमिनियम इंडस्ट्री के चुनौतीपूर्ण क्षेत्र कास्ट हाउस में काम करते हुए अंशिका ने नवाचार, मेहनत और आत्मविश्वास के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। अंशिका के अनुसार, शुरुआत में शॉप फ्लोर पर खुद को साबित करना और सहकर्मियों का भरोसा हासिल करना उनके लिए बड़ी चुनौती थी। बालको में नए विचारों पर काम करने का अवसर मिला और वरिष्ठ अधिकारियों ने उन पर भरोसा जताया। इसी भरोसे ने उन्हें लगातार बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। प्रबंधन के सहयोग से उन्होंने ‘सम्मान एवं पुरस्कार’ पहल की शुरुआत की, जिससे टीम का उत्साह बढ़ा और बेहतर परिणाम हासिल करने में मदद मिली। आज शॉप फ्लोर पर अंशिका की पहचान महिला इंजीनियर के रूप में नहीं, बल्कि उनकी काबिलियत और कार्यक्षमता के आधार पर होती है।


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बालको में कार्यरत अरुणा ने एनआईटी सिक्किम से इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। कॉलेज के बाद सीधे प्लांट में काम शुरू करने को लेकर शुरुआती झिझक के बावजूद सहकर्मियों के सहयोग और वरिष्ठ अधिकारियों के विश्वास ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। अपने काम के प्रति जुनून और सीखने की ललक के साथ उन्होंने बीते चार वर्षों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। अरुणा का कहना है कि जब वरिष्ठ अधिकारी काम के आधार पर भरोसा जताते हैं, तो जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने हर जिम्मेदारी को मेहनत और लगन से पूरा किया, जिससे उन्हें लगातार सीखने के अवसर मिले और आत्मविश्वास मजबूत हुआ। उनका मानना है कि कार्यस्थल पर सफलता पद या वरिष्ठता से नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों को पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाने से मिलती है।


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इसी जिम्मेदारी के तहत उनकी टीम को बालको में बिजली के बैकअप सिस्टम को और बेहतर बनाने की चुनौती मिली। टीम ने पूरे सिस्टम को स्काडा के माध्यम से केंद्रीकृत किया। इससे विभिन्न प्रकार के डेटा की निगरानी और विश्लेषण के जरिए संभावित समस्याओं का पहले ही पता लगाना संभव हुआ। समय रहते आवश्यक कदम उठाने से बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बेहतर हुई। इस महत्वपूर्ण कार्य में योगदान के लिए अरुणा को प्लांट के सर्वोच्च सम्मान ‘सीईओ अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।

बालको की महिला इंजीनियरों की ये उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानियां नहीं हैं, बल्कि मैन्यूफैक्चरिंग इंडस्ट्री में आ रहे सकारात्मक बदलाव की तस्वीर भी पेश करती हैं। तकनीकी दक्षता, नेतृत्व और आत्मविश्वास के साथ वे उन क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं, जिन्हें कभी मुख्य रूप से पुरुषों से जोड़कर देखा जाता था। उनकी उपलब्धियां साबित करती हैं कि अवसर और अनुकूल कार्य-वातावरण मिलने पर महिलाएं एल्यूमिनियम उत्पादन के हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ी की महिला इंजीनियरों को नए सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा दे रही है।