बीजापुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन अभियान को एक और बड़ी सफलता मिली है। झारखंड राज्य में लंबे समय से सक्रिय 8 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए बीजापुर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में 5 महिला माओवादी भी शामिल हैं। इन सभी पर सरकार की ओर से कुल 49 लाख रुपये का इनाम घोषित था। यह आत्मसमर्पण झारखंड पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और बीजापुर पुलिस के संयुक्त प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों ने इसे माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका बताते हुए कहा कि लगातार चल रहे अभियान और पुनर्वास नीति के कारण माओवादी मुख्यधारा की ओर लौट रहे हैं।
पुलिस के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी लंबे समय से झारखंड के विभिन्न इलाकों में सक्रिय थे और संगठन के लिए कई गतिविधियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति, बीजापुर जिले में संचालित पुनर्वास एवं कौशल विकास कार्यक्रमों तथा पहले आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों के सफल पुनर्वास से प्रभावित होकर इन कैडरों ने हथियार छोड़ने का फैसला किया। आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों ने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि संगठन की हिंसक विचारधारा से उनका विश्वास उठ चुका है और अब वे सामान्य नागरिक की तरह शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं।
पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों ने यह भी माना कि माओवादी संगठन आदिवासी समुदाय के हितों की बात करने का दावा करता है, लेकिन वास्तविकता में उसकी गतिविधियां स्थानीय लोगों के विकास में बाधा बन रही हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की लगातार बढ़ती कार्रवाई, गांवों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विकास कार्यों के विस्तार तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से प्रभावित होकर उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।
आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख माओवादी कैडरों में अश्विन उर्फ लच्छू, जो दक्षिण जोनल कमेटी का डीवीसीएम/जेडसीएम सदस्य था, शामिल है। उस पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अलावा रंगा उर्फ सोहन और दोबा माड़वी उर्फ राहत, जो सरांडा सब जोनल कमेटी के सदस्य थे, उन पर भी 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वहीं फगनी पोयम उर्फ रजनी, सूरज मुन्नी चम्पिया उर्फ सुबनी, हिड़मे कड़ती उर्फ रीता, बुधरी कुंजाम उर्फ अनुषा तथा सलमी चम्पिया उर्फ जिलानी पर 5-5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें अधिकांश महिला कैडर लंबे समय से संगठन के विभिन्न स्तरों पर सक्रिय थीं।
बीजापुर पुलिस ने बताया कि सभी आत्मसमर्पित माओवादियों को छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत नियमानुसार आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। पुनर्वास योजना के तहत कौशल विकास प्रशिक्षण, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर, आवास, शिक्षा तथा अन्य सामाजिक और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे दोबारा हिंसा के रास्ते पर न लौटें।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिला प्रशासन और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से इन सभी आत्मसमर्पित माओवादियों को समाज में पुनर्स्थापित करने के लिए निरंतर मार्गदर्शन देंगे। उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ आत्मनिर्भर बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि सरकार का उद्देश्य केवल माओवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाना नहीं, बल्कि भटके हुए युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। पुलिस ने इस सफलता का श्रेय बीजापुर पुलिस, झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के बीच बेहतर समन्वय, विश्वास निर्माण और संवेदनशील कार्यशैली को दिया है।
अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा बलों की लगातार सक्रियता और सरकार की पुनर्वास नीति के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिससे संगठन की ताकत लगातार कमजोर हुई है। पुलिस ने क्षेत्र में सक्रिय अन्य माओवादी कैडरों से भी अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें और शासन की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर सामान्य जीवन की ओर लौटें। अधिकारियों का कहना है कि जो लोग हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं, उनके लिए सरकार हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
