अतिथि शिक्षकों पर कार्रवाई: साथ खड़े हुए अरुण वोरा, कहा- लोकतंत्र पर लाठी चलाना दुर्भाग्यपूर्ण

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दुर्ग। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले 22 दिनों से हिंदी भवन के सामने शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से धरने पर बैठे अतिथि शिक्षकों के आंदोलन पर प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरुण वोरा ने कड़ी निंदा की है। देर रात धरना स्थल से टेंट हटाने और जब्त करने के बाद गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में आंदोलनरत शिक्षकों को बसों में बैठाकर वहां से हटाया गया। इसके साथ ही शिक्षकों के अस्थायी निवास स्थल को भी खाली कराया गया तथा धरना स्थल पर लगाए गए टेंट एवं अन्य सामग्री को उखाड़ दिया गया।

प्रशासन की इस कार्रवाई की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरुण वोरा धरना स्थल पहुंचे और आंदोलनरत अतिथि शिक्षकों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी जायज मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन प्रदेश सरकार ने संवाद और समाधान का रास्ता अपनाने के बजाय दमनात्मक कार्रवाई का सहारा लिया है, जो पूरी तरह अलोकतांत्रिक और निंदनीय है।

अरुण वोरा ने कहा कि, अतिथि शिक्षक वर्षों से प्रदेश के दूरस्थ, आदिवासी एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान कार्य के बदले समान वेतन तथा मानदेय वृद्धि जैसी उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए था। दुर्भाग्यपूर्ण है कि, सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनकी आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि, शिक्षक समाज और राष्ट्र के भविष्य के निर्माता होते हैं। उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार न केवल शिक्षकों का बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का भी अपमान है। सरकार को चाहिए कि, वह आंदोलनरत शिक्षकों से सम्मानपूर्वक संवाद स्थापित कर उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक एवं ठोस निर्णय ले।
अरुण वोरा ने चेतावनी देते हुए कहा कि, यदि सरकार ने अतिथि शिक्षकों की जायज मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया और दमनात्मक रवैया जारी रखा, तो कांग्रेस पार्टी आंदोलनरत शिक्षकों के समर्थन में लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष को और तेज करेगी।