Mahadev Betting App Case: सौरभ चंद्राकर के नाम से फर्जी पासपोर्ट का दावा, फोटो उसकी और पहचान श्रीलंकाई क्रिकेटर के नाम पर; ओमान में गिरफ्तारी के बाद जांच तेज

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रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले के प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर की ओमान में गिरफ्तारी के बाद अब कथित फर्जी पासपोर्ट को लेकर जांच एजेंसियों की पड़ताल तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक ऐसा पासपोर्ट सामने आया है जिसमें फोटो सौरभ चंद्राकर की बताई जा रही है, जबकि नाम श्रीलंकाई क्रिकेटर अजंता मेंडिस का दर्ज होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस दस्तावेज की आधिकारिक पुष्टि जांच एजेंसियों की ओर से अभी नहीं की गई है।

जांच एजेंसियों को आशंका है कि कथित फर्जी पहचान का इस्तेमाल विदेश यात्रा और कानूनी कार्रवाई से बचने के उद्देश्य से किया गया हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पासपोर्ट संख्या E3387986 वाले दस्तावेज में अलग पहचान और जन्मतिथि दर्ज होने की बात सामने आई है। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह दस्तावेज किस नेटवर्क के जरिए तैयार किया गया और इसका इस्तेमाल कहां-कहां किया गया। जांच में यह भी सामने आने की बात कही जा रही है कि सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल ने पहले वानुआतु की नागरिकता हासिल की थी। अलग-अलग दस्तावेजों में जन्मतिथि और पहचान संबंधी जानकारियों में अंतर मिलने के बाद एजेंसियां पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रही हैं।

सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक मामले में प्रमुख आरोपियों में शामिल है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और CBI कथित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रहे हैं। हाल ही में इंटरपोल की Commission for the Control of INTERPOL’s Files (CCF) ने सौरभ चंद्राकर की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अपने खिलाफ जारी रेड नोटिस हटाने की मांग की थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, चंद्राकर ने दावा किया था कि भारत में उसके खिलाफ मामला राजनीतिक कारणों से दर्ज किया गया है, जबकि CCF ने मामले को वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा बताया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर के UAE से ओमान पहुंचने और कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों को आशंका है कि पहचान बदलकर यात्रा करना प्रत्यर्पण प्रक्रिया में देरी करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। सौरभ चंद्राकर वर्ष 2019 से फरार बताया जा रहा था। इससे पहले UAE में उसे इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर हिरासत में लिया गया था और भारत ने उसके प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध भी भेजा था। फिलहाल ओमान में उसकी गिरफ्तारी के बाद भारतीय जांच एजेंसियां आगे की कानूनी प्रक्रिया पर काम कर रही हैं।