20 साल बाद सिंगूर में टाटा की वापसी की उम्मीद! कभी विरोध का केंद्र रहा प्लांट अब विकास की नई राह तलाश रहा

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल के सिंगूर में करीब दो दशक बाद टाटा ग्रुप की वापसी की संभावनाएं फिर से चर्चा में हैं। कभी राजनीतिक संघर्ष और आंदोलन का केंद्र रहा सिंगूर अब एक बार फिर उद्योग और रोजगार की उम्मीदों से जुड़ गया है। राज्य सरकार की ओर से टाटा के साथ शुरुआती स्तर पर बातचीत की बात कही गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। सरकार का कहना है कि अगर टाटा ग्रुप दोबारा सिंगूर लौटने के लिए तैयार होता है, तो इलाके में औद्योगिक विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। साल 2006 में टाटा मोटर्स के नैनो कार प्रोजेक्ट के लिए करीब 1000 एकड़ जमीन अधिग्रहण को लेकर बड़ा विवाद हुआ था। ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद टाटा को अपना प्रोजेक्ट गुजरात स्थानांतरित करना पड़ा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जमीन किसानों को वापस कर दी गई थी।

अब कई स्थानीय किसान और ग्रामीण फिर से उद्योग आने की उम्मीद जता रहे हैं। उनका कहना है कि बड़े उद्योग से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्र का विकास होगा। हालांकि, जमीन की बढ़ी कीमतें और मुआवजे का मुद्दा सरकार के लिए बड़ी चुनौती हो सकता है। सिंगूर की जमीन की कीमत पिछले 20 वर्षों में कई गुना बढ़ चुकी है। ऐसे में अगर टाटा की वापसी होती है तो यह फैसला बंगाल की औद्योगिक राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।