बिलासपुर। पारिवारिक जिम्मेदारियों और बच्चों की पढ़ाई के कारण स्थानांतरण की मांग कर रहे एक व्याख्याता ने हाईकोर्ट में स्वयं अपना पक्ष रखा और राहत हासिल की। अदालत ने स्कूल शिक्षा विभाग को उनके आवेदन पर 45 दिनों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के हाई स्कूल मरकेली में पदस्थ व्याख्याता गया राम दुबे ने बिना किसी अधिवक्ता की मदद के न्यायालय में अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि उनके बच्चे भिलाई में पढ़ाई कर रहे हैं और उनकी देखभाल के लिए परिवार में कोई अन्य सदस्य नहीं है। वर्तमान पदस्थापना स्थल और भिलाई के बीच लंबी दूरी होने से उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता ने बताया कि जून 2025 में उनका तबादला बालोद जिले के कुमुदकट्टा से मरकेली किया गया था। लगभग एक वर्ष की सेवा के बाद उन्होंने बालोद या दुर्ग जिले में स्थानांतरण के लिए आवेदन दिया, लेकिन विभाग ने उस पर कोई निर्णय नहीं लिया। सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने भी आवेदन पर निर्णय लेने के अनुरोध का विरोध नहीं किया। इस पर हाईकोर्ट ने माना कि किसी कर्मचारी के आवेदन को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता और संबंधित अधिकारी को 45 दिनों के भीतर नियमानुसार फैसला लेने का निर्देश दिया।
