नई दिल्ली। वैश्विक तबाही और महाविनाश का संकेत देने वाली ‘डूम्सडे क्लॉक’ (Doomsday Clock) ने पूरी दुनिया के लिए खतरे का सबसे बड़ा अलार्म बजा दिया है। बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स के वैज्ञानिकों ने इस प्रतीकात्मक घड़ी की सुइयों को चार सेकंड और आगे बढ़ा दिया है, जिसके बाद अब इंसानियत आधी रात (यानी पूर्ण विनाश) से सिर्फ 85 सेकंड की दूरी पर खड़ी है। यह इतिहास में अब तक का सबसे खतरनाक और डरावना स्तर है, जो यह दर्शाता है कि मानव सभ्यता खुद को खत्म करने के मुहाने पर पहुंच चुकी है।
यह कोई आम समय बताने वाली घड़ी नहीं, बल्कि परमाणु खतरों, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक असुरक्षा को भांपने वाला एक सिम्बॉलिक सिस्टम है, जिसे दूसरे विश्व युद्ध के बाद वैज्ञानिकों ने तैयार किया था। साल 1947 में जब यह घड़ी पहली बार दुनिया के सामने आई, तब यह आधी रात से 7 मिनट दूर थी। वहीं, शीत युद्ध की समाप्ति के बाद जब परमाणु तनाव कम हुआ, तो इसे सबसे सुरक्षित यानी 17 मिनट पीछे कर दिया गया था।
लेकिन हालिया दौर में रूस, चीन और अमेरिका जैसी महाशक्तियों के बीच बढ़ती परमाणु हथियारों की होड़ और लगातार जारी युद्धों ने स्थिति को बदतर कर दिया है। साल 2023 में यह घड़ी 90 सेकंड, 2025 में 89 सेकंड और अब 2026 में खिसककर महज 85 सेकंड पर आ गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, कई आपस में जुड़े वैश्विक संकट और परमाणु शक्तियों के बीच सैन्य टकराव का बढ़ता जोखिम ही इस विनाशकारी बदलाव की सबसे बड़ी वजह है।
