रायपुर। देशहित में ईंधन बचाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील छत्तीसगढ़ में एक बड़े विवाद में बदल गई है। राज्य में एक तरफ जहां मंत्री और नेता सोशल मीडिया पर साइकिल चलाने या काफिला छोटा करने का प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। राजधानी रायपुर के नागरिकों का कहना है कि, सरकार की खस्ताहाल पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था के कारण आज हर व्यक्ति निजी वाहन इस्तेमाल करने पर मजबूर है। रायपुर की सिटी बसें पंडरी में धूल खा रही हैं और सरकार निजी बस संचालकों के आगे नतमस्तक है। लोगों ने सवाल उठाया कि मंत्रालय के कर्मचारियों के लिए तो बसें चलती हैं, लेकिन आईएएस-आईपीएस अधिकारी अलग-अलग चमचमाती गाड़ियों में क्यों घूमते हैं? सबसे पहले इस वीआईपी कल्चर पर लगाम लगनी चाहिए।
ईंधन संकट के बीच पेट्रोल पंपों पर मचे हाहाकार ने जनता की नाराजगी और बढ़ा दी है। आम लोग अस्पतालों और जरूरी कामों के लिए घंटों लाइनों में लग रहे हैं, जबकि नेताओं के परिवारों और सरकारी गाड़ियों को बिना कतार के पेट्रोल-डीजल मिल रहा है। सोशल मीडिया पर मंत्रियों की ‘साइकिल पॉलिटिक्स’ को जनता महज एक ढोंग और नौटंकी बता रही है। इस बीच किसान नेताओं ने भी सरकार को बड़ी चेतावनी दी है। किसानों का कहना है कि, खेती पूरी तरह ट्रैक्टर और डीजल पर निर्भर है। अगर समय पर डीजल और खाद नहीं मिली, तो इस साल पैदावार ठप हो जाएगी, जिससे देश में भयंकर महंगाई और कालाबाजारी बढ़ेगी। कुल मिलाकर, पीएम की इस अपील ने छत्तीसगढ़ में वीआईपी बनाम आम जनता की एक नई बहस छेड़ दी है।
