पटवारी की चूक से सुलगी जमीन की जंग:कोर्ट के आदेश भी बेअसर, गांव में बढ़ा तनाव

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डोंगरगढ़। ग्राम पारागांव खुर्द में जमीन सीमांकन की गड़बड़ी ने दो परिवारों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को गंभीर रूप दे दिया है। राजस्व विभाग की शुरुआती लापरवाही अब गांव में तनाव का कारण बन चुकी है और स्थिति कभी भी बड़े विवाद में बदलने की आशंका जताई जा रही है।

जानकारी अनुसार, लिखन लाल लोधी ने वर्ष 2008 में करीब 1.42 एकड़ जमीन खरीदी थी और तब से उस पर काबिज हैं। उसी दौरान पास में रामकुमार लोधी ने भी जमीन खरीदी थी। वर्षों तक सब सामान्य रहा, लेकिन खसरा नंबर 217/3 और 217/5 के सीमांकन और नक्शे में अंतर सामने आने के बाद विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि, राजस्व अमले द्वारा नक्शे में की गई त्रुटियों और बदलाव ने जमीन की वास्तविक स्थिति को बदल दिया, जिससे दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।

लिखन लाल का कहना है कि, वे न्याय के लिए तहसील से लेकर आयुक्त और राजस्व मंडल तक लगातार प्रयास कर चुके हैं। कई स्तरों पर उनके पक्ष में आदेश भी आए, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं हुआ। एसडीएम (SDM) डोंगरगढ़ ने भी अपने आदेश में विवादित जमीन पर लिखन लाल का कब्जा माना और दूसरे पक्ष को हस्तक्षेप से रोका था। इसके बावजूद हर साल उनकी फसल काटे जाने और विरोध करने पर धमकी मिलने के आरोप सामने आ रहे हैं।

इस मामले ने तब और तूल पकड़ा जब उच्च अधिकारियों ने भी माना कि, नक्शा सुधार में निचले स्तर पर गलती हुई है। नियमों के अनुसार इस तरह का संशोधन केवल कलेक्टर स्तर पर होना चाहिए था, लेकिन तहसील स्तर पर ही बदलाव कर दिया गया, जिसे बाद में अमान्य करार दिया गया। इससे प्रशासनिक लापरवाही स्पष्ट होती है।

वहीं, पटवारी लिकेश साहू का कहना है कि, मैनुअल रिकॉर्ड, ऑनलाइन दस्तावेज और आरटीआई से प्राप्त नक्शों में अंतर के कारण स्थिति जटिल हो गई है। जमीन का वास्तविक मिलान नहीं होने से सीमांकन में परेशानी आ रही है। फिलहाल मामला एसडीएम (SDM) न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय वहीं से होगा। लगातार अनदेखी से नाराज लिखन लाल ने आंदोलन की चेतावनी दी है। गांव के लोगों का मानना है कि, यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो यह विवाद बड़ा रूप ले सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती है कि, वह जल्द निष्पक्ष कार्रवाई कर स्थिति को नियंत्रित करे और ग्रामीणों को राहत दिलाए।