सावन शिवरात्रि- महाशिवरात्रि में क्या है बड़ा अंतर: जानें दोनों का महत्व और पूजा का सही समय

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सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान आने वाली सावन शिवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व होता है। कई लोग सावन शिवरात्रि और महाशिवरात्रि को एक ही पर्व समझ लेते हैं, जबकि दोनों का समय, महत्व और धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग हैं। इस वर्ष सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि होती है। वहीं, फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी पर आने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है, जिसे भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का पर्व माना जाता है।

 

इसलिए यह वर्ष का सबसे बड़ा शिव उत्सव है। दूसरी ओर, सावन शिवरात्रि भगवान शिव के प्रिय श्रावण मास में पड़ने के कारण विशेष फलदायी मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से की गई पूजा से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं, मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही, कांवड़ यात्रा का समापन भी सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक के साथ होता है।