सड़क पर उतरे ग्रामीण: NH-130C जाम, पुलिया निर्माण को लेकर बढ़ा विरोध

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गरियाबंद। विकास की सुस्त रफ्तार और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ मंगलवार को गरियाबंद का मैनपुर ब्लॉक आक्रोश की आग में सुलग उठा। अमाड़ पंचायत के सैकड़ों ग्रामीणों ने अपनी वाजिब मांग- एक सुरक्षित पुलिया निर्माण- को लेकर नेशनल हाईवे-130C पर अनिश्चितकालीन चक्काजाम कर दिया है। इस प्रदर्शन की सबसे मार्मिक तस्वीर तब दिखी, जब चिलचिलाती धूप में स्कूली बच्चे अपनी वर्दी पहने हाथों में तख्तियां लेकर सड़क पर बैठ गए। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि, कलेक्टर तक गुहार लगाने के 15 दिन बाद भी जब प्रशासन की नींद नहीं खुली, तब उन्हें मजबूरन यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।

विवाद की जड़ पट्टाबहाल नाले पर बनने वाला वह उच्च स्तरीय पुल है, जिसके लिए 1.49 करोड़ रुपये की स्वीकृति तो मिल गई, लेकिन नियोजन की कमी ने ग्रामीणों की मुसीबत बढ़ा दी। ठेका कंपनी ने काम शुरू करते समय पुराने रपटे को जमींदोज कर दिया, मगर अब ‘एनओसी’ (NOC) के तकनीकी पेंच में फंसकर निर्माण कार्य बंद पड़ा है। मानसून की आहट ने ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ा दी हैं; उन्हें डर है कि, बारिश शुरू होते ही अस्थाई कच्चा रास्ता बह जाएगा और पूरा इलाका टापू बन जाएगा। ऐसी स्थिति में स्कूल जाने वाले बच्चों, बीमार बुजुर्गों और प्रसूताओं के लिए अस्पताल पहुँचना नामुमकिन हो जाएगा।

जिला पंचायत सदस्यों के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन ने प्रशासन और वन विभाग के बीच तालमेल की पोल खोल दी है। ग्रामीणों का कहना है कि, यह आदिवासियों के साथ सौतेला व्यवहार है, जहाँ एक तरफ पुराने रास्ते छीन लिए गए और दूसरी तरफ नया निर्माण अधर में लटका दिया गया। हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें और प्रदर्शनकारियों की जिद यह साफ कर रही है कि अब कोरे आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। जब तक धरातल पर रपटे की मरम्मत और पुल निर्माण का ठोस समाधान नहीं निकलता, बस्तर और गरियाबंद को जोड़ने वाली यह लाइफलाइन जाम रहेगी।