अमेरिकी। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने तारों के निर्माण वाले क्षेत्र वाले ट्राइफिड नेबुला की एक शानदार नई तस्वीर जारी की है। यह तस्वीर हबल टेलीस्कोप की लॉन्चिंग की 36वीं वर्षगांठ (24 अप्रैल) के अवसर पर साझा की गई है। पृथ्वी से करीब 5,000 प्रकाश वर्ष दूर स्थित यह नेबुला अंतरिक्ष में गैस, धूल और नवजात तारों से भरा एक सक्रिय क्षेत्र है, जहां लगातार नए सितारों का निर्माण हो रहा है। दरअसल यह नई तस्वीर केवल देखने में खूबसूरत नहीं है, बल्कि वैज्ञानिकों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। इससे ब्रह्मांड में तारा निर्माण की जटिल प्रक्रियाओं, गैस और धूल की संरचनाओं व समय के साथ अंतरिक्षीय बदलावों को समझने में मदद मिलेगी। हबल टेलीस्कोप कई दशकों से अंतरिक्ष के अनसुलझे रहस्यों को उजागर कर रहा है और यह तस्वीर उसी मिशन की नई उपलब्धि मानी जा रही है। वहीं वैज्ञानिकों के अनुसार, इस नेबुला में मौजूद विशाल और शक्तिशाली तारे अपने आसपास की गैस और धूल पर गहरा प्रभाव डालते हैं। इन तारों से निकलने वाली तेज ऊर्जा, विकिरण और तारकीय हवाएं गैस के बादलों को धकेलती हैं, जिससे कई जगह दबाव बनता है और नए तारों के जन्म की प्रक्रिया शुरू होती है। हबल द्वारा ली गई यह तस्वीर इस पूरी गतिविधि को बेहद बारीकी से दिखाती है, जिससे खगोलविद यह समझ पा रहे हैं कि समय के साथ तारा निर्माण कैसे विकसित होता है।
आपको बता दें की तस्वीर में एक बेहद अनोखी आकृति भी दिखाई देती है, जिसे वैज्ञानिकों ने ‘कॉस्मिक सी लेमन’ जैसा नाम दिया है। गैस और धूल से बनी यह संरचना किसी समुद्री जीव जैसी नजर आती है। इसके भीतर कई युवा तारे बन रहे हैं। इनमें से कुछ तारे अपने आसपास जेट के रूप में ऊर्जा छोड़ रहे हैं। ये जेट प्लाज्मा की तेज धाराओं के रूप में बाहर निकलते हैं और आसपास के वातावरण से टकराकर वहां नई हलचल पैदा करते हैं। हबल स्पेस टेलीस्कोप ने इससे पहले वर्ष 1997 में भी इसी नेबुला का अध्ययन किया था। अब करीब तीन दशक बाद फिर उसी क्षेत्र की नई तस्वीर लेकर वैज्ञानिकों को तुलना करने का अवसर मिला है। इससे पता लगाया जा सकेगा कि इतने लंबे समय में गैस, धूल और तारों की संरचना में क्या बदलाव आए हैं। इस बार हबल के उन्नत कैमरों और बेहतर तकनीक की वजह से पहले से कहीं अधिक स्पष्ट और विस्तृत तस्वीर सामने आई है। वहीं तस्वीर में दिखाई देने वाले अलग-अलग रंग भी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी देते हैं। नीले रंग वाले हिस्से अपेक्षाकृत साफ क्षेत्र हैं, जहां बड़े तारों की पराबैंगनी रोशनी ने गैस को आयनित कर दिया है। वहीं गहरे भूरे और काले रंग के क्षेत्र घनी धूल को दर्शाते हैं, जहां अभी भी नए तारों का निर्माण जारी है और जो सामान्य रोशनी में साफ दिखाई नहीं देते। इस नेबुला में कई प्रोटोस्टार यानी नवजात तारे मौजूद हैं, जो अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुए हैं। कुछ स्थानों पर दिखाई देने वाली गैस की धाराएं और जेट संकेत देते हैं कि ये तारे सक्रिय अवस्था में हैं और अपने आसपास ऊर्जा छोड़ रहे हैं। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलती है कि नए तारे अपने वातावरण के साथ किस तरह प्रतिक्रिया करते हैं और उनके बनने की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है। तस्वीर के एक हिस्से में घनी धूल के कारण लगभग अंधेरा क्षेत्र दिखाई देता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि वहां दिखने वाले कुछ तारे वास्तव में इस नेबुला का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि पृथ्वी के अपेक्षाकृत करीब स्थित हो सकते हैं। वहीं कुछ चमकीले नारंगी रंग के तारे पूरी तरह विकसित हो चुके हैं और उन्होंने अपने आसपास की धूल को साफ कर दिया है।
