विट्ठल मंदिर भारत की प्राचीन वास्तुकला और कला का एक अद्भुत नमूना है, जो आज भी लोगों को हैरान कर देता है। तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और अपनी अनोखी बनावट के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है।

15वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के दौरान बने इस मंदिर को राजा देवराय द्वितीय ने बनवाया था, जबकि कृष्णदेवराय ने इसे और भव्य रूप दिया। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार विट्ठल को समर्पित है और इसकी दीवारों पर की गई बारीक नक्काशी आज भी जीवंत नजर आती है।

मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही विशाल पत्थर का रथ सबसे पहले ध्यान आकर्षित करता है, जो भारतीय शिल्पकला का शानदार उदाहरण है। लेकिन इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत हैं इसके 56 म्यूजिकल पिलर्स, जिन्हें ‘सारेगामा स्तंभ’ कहा जाता है। इन स्तंभों को हल्के से छूने या थपथपाने पर संगीत के सुरों जैसी ध्वनि निकलती है।

हैरानी की बात यह है कि, ये स्तंभ ठोस ग्रेनाइट पत्थर से बने हैं और इनमें कोई खोखलापन नहीं है। इसके बावजूद इनमें से अलग-अलग वाद्ययंत्रों जैसी आवाजें निकलती हैं। यही कारण है कि, यह रहस्य आज भी वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय बना हुआ है। कहा जाता है कि, ब्रिटिश काल में इस रहस्य को जानने के लिए कुछ स्तंभों को काटा भी गया, लेकिन अंदर कुछ खास नहीं मिला। विट्ठल मंदिर आज भी इतिहास, विज्ञान और आस्था का अनोखा संगम बना हुआ है।
