800 साल पुराने रामप्पा मंदिर का अनोखा रहस्य, पानी में तैरने वाले पत्थर आज भी करते हैं हैरान

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नई दिल्ली। आधुनिक इंजीनियरिंग के दौर में भी भारत की प्राचीन निर्माण कला कई बार दुनिया को चौंका देती है। तेलंगाना का प्रसिद्ध रामप्पा मंदिर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां सदियों पुरानी तकनीक आज भी वैज्ञानिकों और पर्यटकों के लिए रहस्य बनी हुई है। तेलंगाना के मुलुगु जिले में स्थित काकतीय रुद्रेश्वर मंदिर को दुनिया रामप्पा मंदिर के नाम से जानती है। भगवान रामलिंगेश्वर स्वामी को समर्पित इस मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में काकतीय वंश के शासनकाल में हुआ था। इसे सेनापति रेचारला रुद्र की देखरेख में बनवाया गया था और इसके निर्माण में करीब 40 साल लगे।

मंदिर की सबसे खास बात इसकी अद्भुत वास्तुकला है। विशाल स्तंभ, बारीक नक्काशी और पिरामिड शैली की संरचना उस समय के शिल्पकारों की असाधारण प्रतिभा को दर्शाती है। कहा जाता है कि मंदिर में इस्तेमाल की गई कुछ हल्की ईंटें और पत्थर पानी में तैर सकते हैं। पुरातत्व विशेषज्ञों ने भी इन पत्थरों की हल्की संरचना को लेकर अध्ययन किया है। यही अनोखी तकनीक रामप्पा मंदिर को दुनिया भर में खास पहचान दिलाती है। 25 जुलाई 2021 को इस ऐतिहासिक मंदिर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। आज यह प्राचीन भारत की वैज्ञानिक सोच और शानदार कला का प्रतीक बना हुआ है।