देव स्नान के साथ शुरू हुई भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा महोत्सव की धार्मिक परंपराएं

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कोरबा। भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा महोत्सव की धार्मिक परंपराओं का शुभारंभ देव स्नान पूर्णिमा के साथ हो गया। कोरबा के दादरखुर्द स्थित जगन्नाथ मंदिर सहित जिले के विभिन्न जगन्नाथ मंदिरों में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा एवं सुदर्शन भगवान का वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ 108 कलशों के पवित्र जल से महाभिषेक किया गया। स्नान के लिए उपयोग किए गए जल में 22 प्रकार की औषधियां एवं दुर्लभ जड़ी-बूटियां मिलाई गईं, जिन्हें धार्मिक परंपरा के अनुसार रोगनाशक एवं पवित्र माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार देव स्नान पूर्णिमा वर्ष का वह विशेष अवसर होता है, जब महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को गर्भगृह से बाहर लाकर स्नान मंडप में विराजमान कराया जाता है। अधिक स्नान के कारण भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और इसके बाद 15 दिनों तक अणसर गृह में विश्राम करते हैं। इस अवधि में श्रद्धालुओं को प्रत्यक्ष दर्शन नहीं होते। मान्यता है कि इस दौरान भगवान स्वास्थ्य लाभ करते हैं और पुन: नेत्र उत्सव के दिन भक्तों को दर्शन देते हैं। मंदिर समिति के अनुसार 14 जुलाई को नेत्र उत्सव मनाया जाएगा, जबकि 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। रथयात्रा में हजारों श्रद्धालु महाप्रभु के रथ को खींचकर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे।

रथयात्रा के बाद भगवान नौ दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहेंगे, जहां श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। रथयात्रा महोत्सव के अंतर्गत 20 जुलाई को हेरा पंचमी, 23 जुलाई को नवमी संध्या दर्शन, 24 जुलाई को बहुड़ा यात्रा, 25 जुलाई को हरिशयनी एकादशी एवं स्वर्ण वेश दर्शन, 26 जुलाई को अधरपणा की परंपरा तथा 27 जुलाई को नीलाद्री विजय के साथ महाप्रभु का पुन: श्रीमंदिर में प्रवेश होगा। मंदिरों में इन सभी आयोजनों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। श्रद्धालुओं में भी रथयात्रा को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है और बड़ी संख्या में भक्त इस महापर्व में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।