गेम रेंजर खोंड़ की तानाशाही:मुख्य वन संरक्षक के आदेश को दिखा रहे ठेंगा,आरटीआई कानून की उड़ाई धज्जियां

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चिरमिरी। सरगुजा संभाग के महत्वपूर्ण क्षेत्र के अंतर्गत सूचना का अधिकार (RTI अधिनियम को गेम रेंजर किस तरह ठेंगा दिखा रहे हैं, हाथी अभ्यारण्य क्षेत्र के गेम रेंजर खोंड़ पर वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की सरेआम अवहेलना करने और आरटीआई के तहत जानकारी छिपाने के गंभीर आरोप हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्यालय मुख्य वन संरक्षक (प्रोजेक्ट एलीफेंट), सरगुजा ने सख्त रुख अपनाते हुए गेम रेंजर को अंतिम चेतावनी जारी की है।

आदेश हवा में उड़ाए, एलिफेंट रिजर्व क्षेत्र की जानकारी दबाकर बैठे रेंजर प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, आवेदक जितेन्द्र कुमार सिंह ने आरटीआई के तहत एलीफेंट रिजर्व के गेम रेंजर खोंड़ से कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी थीं। संवेदनशील हाथी अभ्यारण्य क्षेत्र से जुड़ी जानकारी छुपाने की नीयत से जब समय पर जवाब नहीं दिया गया, तो मामला प्रथम अपीलीय अधिकारी तक पहुंचा। प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं उप निदेशक ने 11 अगस्त 2026 को कड़ा आदेश जारी कर गेम रेंजर खोंड़ को निर्देशित किया था कि वे 10 दिनों के भीतर नि:शुल्क जानकारी आवेदक को सौंपें और कार्यालय को सूचित करें। लेकिन गेम रेंजर ने इस आदेश को रद्दी की टोकरी में डाल दिया और तय समय सीमा बीतने के बाद भी जानकारी दबाकर बैठे रहे।

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हाथी अभ्यारण्य में भारी भ्रष्टाचार क्यों बच रहे हैं गेम रेंजर जवाब देने सेएलिफेंट रिजर्व जैसे संवेदनशील और करोड़ों रुपये के बजट वाले क्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों के लिखित आदेश के बाद भी गेम रेंजर खोंड़ द्वारा जानकारी न देना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। कि मांगी गई जानकारियों में हाथी अभ्यारण्य के विकास कार्यों, मुआवजा वितरण या कैम्पा मद के बड़े वित्तीय घपले और प्रशासनिक अनियमितताएं छिपी हो सकती हैं। आरटीआई कानून के इस खुले उल्लंघन के बाद अब गेम रेंजर की कार्यप्रणाली पर भारी भ्रष्टाचार का अनुमान लगाया जा रहा है।

मुख्य वन संरक्षक (प्रोजेक्ट एलीफेंट) ने दिया 7 दिनों का अल्टीमेटमगेम रेंजर की इस मनमानी के खिलाफ जब आवेदक ने दोबारा शिकायत दर्ज कराई, तो मुख्य वन संरक्षक कार्यालय ने इसे अनुशासनहीनता माना है। कार्यालय द्वारा जारी पत्र (क्रमांक/सू.अ./अपील/2026/1631) के जरिए गेम रेंजर खोंड़ को अंतिम रूप से निर्देशित किया गया है कि वे पत्र प्राप्ति के 7 दिनों के भीतर आवेदक को हर हाल में नि:शुल्क जानकारी उपलब्ध कराएं।यदि इस अंतिम समय सीमा के भीतर भी गेम रेंजर जानकारी नहीं देते हैं, तो उन पर राज्य सूचना आयोग द्वारा भारी जुर्माना लगाने और विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई होना तय माना जा रहा है। जनता अब यह देख रही है कि हाथी अभ्यारण्य क्षेत्र का एक रेंजर स्तर का अधिकारी अपने ही विभाग के सबसे बड़े अधिकारी के आदेश को कब तक चुनौती दे पाता है।