दुर्ग में लगातार बारिश से 764 लोग प्रभावित, 16 राहत शिविरों में ठहराया गया

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दुर्ग। जिले में 24 और 25 सितंबर को लगातार हुई बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए और कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। नगर निगम दुर्ग, भिलाई और ग्रामीण क्षेत्रों के 13 इलाकों में करीब 200 घरों में पानी भरने के बाद 764 लोगों को एसडीआरएफ, प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। प्रभावितों को सामुदायिक केंद्रों, पंचायत भवनों और स्कूलों में बनाए गए कुल 16 अस्थायी राहत शिविरों में पहुंचाया गया है, जहां भोजन, पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। दुर्ग तहसील में 52 परिवारों के 268 लोगों को पांच राहत शिविरों में रखा गया है। वहीं पाटन तहसील के सात गांवों के 117 परिवारों के 345 लोगों को पांच राहत शिविरों में ठहराया गया है। अहिवारा के अकोला में 10 घरों के 46 लोगों और भिलाई-3 तहसील के कुम्हारी क्षेत्र के परसदा में 14 घरों से 73 लोगों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

प्रशासन के अनुसार पाटन क्षेत्र के जामराव, केसरा, पाहंदा, खुड़मुड़ा, रिवागहन और किकिरमेता सहित अन्य प्रभावित इलाकों में भी रेस्क्यू अभियान चलाया गया। कई लोगों को राहत शिविरों में रखा गया, जबकि कुछ प्रभावितों को उनकी इच्छा के अनुसार रिश्तेदारों या परिचितों के यहां सुरक्षित पहुंचाया गया। बोरी तहसील के शिवनाथ नदी किनारे स्थित दनिया गांव में जलभराव में फंसे पति-पत्नी को एसडीआरएफ ने बाहर निकाला। परसदा में जलमग्न घरों से लोगों को नाव की मदद से निकाला गया। लगातार बारिश के बीच कलेक्टर अभिजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल और एसडीआरएफ समेत प्रशासन की टीम ने प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी की। 26 सितंबर की सुबह कलेक्टर ने शिवनाथ नदी और जलभराव वाले इलाकों का दौरा कर अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। महमरा ऐनीकट पर पानी खतरे के स्तर तक पहुंचने के बाद वहां मौजूद लोगों को पुलिस और प्रशासन ने चेतावनी देकर हटाया। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जरूरी काम न होने पर ऐनीकट और नदी के किनारे वाले इलाकों में जाने से बचें।